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पॉलीग्राफी टेस्ट नहीं देता पुख्ता परिणाम

लोगों को सच का सामना कराने का दावा करने वाला रिएलिटी शो सच का सामना खुद सच और झूठ के बीच फंस गया है। संसद में शो की शब्दावली पर सवाल उठाए गए हैं, वहीं विशेषज्ञों ने पॉलीग्राफी टेस्ट की क्षमता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चित हस्तियों की निजी जीवन से संबंधित सवालों का उत्तर जानकार सच या झूठ का फैसला किया जा रहा है।

इन सवालों की कसौटी तय करने के लिए जिस मशीन का इस्तेमाल किया ज रहा है, वह पूरा सच नहीं बताती है। जी हां, पॉलीग्राफी मशीन से सच या झूठ को पूरी तरह से नहीं आंका ज सकता है। यहीं कारण है कि इसे न्यायालय में भी सबूत के रूप में मान्यता नहीं मिल पाई है। पॉलीग्राफी मशीन पर हुए शोधों के अनुसार भी इस टेस्ट से 40-50 फीसदी ही परिणाम सही निकल पाता है।

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  • Web Title:सच का सामना का सच