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कृषि घोटाला : तीन पूर्व मंत्री आ सकते हैं जांच के घेरे में

46 करोड़ रुपये के कृषि घोटाला में झारखंड के तीन पूर्व मंत्री जांच के घेरे में आ सकते हैं। शिकायतकर्ता विनित कच्छप ने पूर्व कृषि मंत्री नलिन सोरेन और निदेशक निस्तार मंत्री को ही अभियुक्त बनाया है, लेकिन निगरानी विभाग जांच का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। कारण यह है कि शिकायतकर्ता ने जो कागजी सबूत कोर्ट में जमा कराया है, उसमें वर्ष 2003 से ही गड़बड़ी किये जाने का आरोप लगाया गया है।

उपलब्ध दस्तावेज सही हैं, तो पूर्व मंत्री देवीधन बेसरा और सत्यानंद भोक्ता भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। राज्य गठन के बाद देवदयाल कुशवाहा प्रथम कृषि मंत्री बने। उनके कार्यकाल में विशेष गड़बड़ी की जानकारी नहीं मिली है। कुशवाहा के बाद देवीधन बेसरा और उनके बाद सत्यानंद भोक्ता कृषि मंत्री बने। घोटाले की शुरूआत बेसरा के कार्यकाल से ही हुई।

विनित से इससे संबंधित कई दस्तावेज निगरानी विभाग को उपलब्ध कराया है। सत्यानंद के कार्यकाल में भी गड़बड़ी अनवरत जारी रही। नलिन सोरेन के मंत्रित्व काल में इसका और अधिक इजाफा हुआ। सभी आरोपों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

बताया जता है कि कृषि विभाग ने कैबिनेट की स्वीकृति के बगैर ही करोड़ों रुपये का बीज खरीदने के लिए एमओयू कर लिया था। कृषि उपकरण की खरीद में भारी गड़बड़ी की गयी। फंड डायवर्ट कर कंबाईंड हाव्रेस्टर मशीन खरीद ली गयी।

इस मशीन का उपयोग समतल जमीन पर किया जाता है, जबकि झारखंड के अधिकांश जिलों की जमीन पथरीली है। ऐसे उन्नत किस्म की बीज की भी खरीद दिखाई गई, जिसका लेबोरेटरी में अनुसंधान ही किया जा रहा है।

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  • Web Title: तीन पूर्व मंत्री आ सकते हैं जांच के घेरे में