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कल्चरल लैंडस्केप कैटेगरी में काशी भी होगी शामिल!

काशी को कल्चरल लैंडस्केप कैटेगरी में शामिल कराने की मुहिम तेज हो गई है। इसके लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण इंडियन हेरिटेज सिटी नेटवर्क (आईएचसीएन) की स्थायी सदस्यता ग्रहण करेगा। इसके बाद शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने में वित्तीय मदद और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सलाह मुफ्त में मिल सकेगी। अब तक हासिल एक साल की अस्थायी सदस्यता की मियाद खत्म होने वाली है।

यहां बता दें कि आईएचसीएन का गठन यूनेस्को ने किया है। मौजूदा समय में उज्जैन, उदयपुर, जयपुर, जोधपुर शहर आईएचसीएन के सदस्य हैं। इन शहरों में धरोहरों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर कवायद शुरू हो गई है। यूपी में सिर्फ बनारस ही ऐसा शहर है जो इंडियन हेरिटेज सिटी नेटवर्क का सदस्य है। वीडीए के उपाध्यक्ष आरपी गोस्वामी ने बताया कि वीडीए को एक साल के लिए आईएचसीएन की अस्थायी सदस्यता भी इंटेक के प्रयास से मिली है। अब प्राधिकरण एक लाख रुपये शुल्क जमा कर स्थायी सदस्यता हासिल करेगा ताकि काशी को कल्चरल लैंडस्केप कैटेगरी में स्थान दिलाया जा सके।

इंटेक के वाराणसी चैप्टर के कन्वीनर नवनीत रमन ने बताया कि अगर वीडीए आईएचसीएन का स्थायी सदस्य बन जाये तो उसे विश्वस्तरीय विशेषज्ञों की सलाह के साथ ही वित्तीय मदद भी मिल पाएगी। यूनेस्को सिर्फ उन्हीं संस्थाओं को मान्यता देता है जो आईएचसीएन के सदस्य है। सदस्य आपस में अनुभवों का आदान-प्रदान कर विश्वस्तरीय धरोहरों को बचाने के लिए मदद करते हैं।

विशेषज्ञ बताएंगे कि किस धरोहर को बचाने के लिए कहां से वित्तीय मदद मिल सकती है। वीडीए अपने स्तर पर भी शहर की धरोहरों को बचाने के लिए करीब 65 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर चुका है। इन योजनाओं के लिए जेएनयूआरएम से वित्तीय मदद लेने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजने की कवायद शुरू हो गई है। 

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