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मेरा सम्मान

मुख्यमंत्री ने जैसे ही मेरे गले में माला डाली, मैंने उनके पैर छू लिए। उन्होंने छूने दिए और मुझे उठाकर शाल ओढ़ाया। फिर मेरे हाथ में नटराज की एक नन्हीं प्रतिमा और एक चेक पकड़ाया। मैंने नटराज को एक तरफ खिसकाकर चेक की तरफ अपना ध्यान केन्द्रित किया। एक लाख का था। मुख्यमंत्री के प्रति मेरा हृदय द्रवित हो गया। मैंने संकल्प ले लिया कि आज ही मुख्यमंत्री वाला दल ज्वाइन कर लूंगा। मैं छलछलाती आंखों से कुर्सी पर बैठा दर्शकों में अपनी बीबी बच्चों को खोजने लगा। आठवीं पंक्ति में, सर पर पल्ला रक्खे मुझे अपनी पत्नी आंसू पोंछती नजर आई। बच्चे उचक-उचक कर मुझे देख रहे थे। मैंने दूर से उन्हें चेक दिखाया। बच्चे वहीं भांगड़ा नाचने लगे। पुलिस वालों ने जान लिया सम्मानप्राप्त कला प्रतिभा के बच्चे हैं नाचने दो थोड़ी देर। सहसा मुझे मेरा यशोगान सुनाई दिया। मेरे बगल में अन्य सम्मान प्राप्त प्रतिभाएं थीं। एक पूर्व पहलवान भी थे। उन्होंने कुहनी मार कर मुझसे पूछा- ये यशोगान तुम्हारा है या मेरा। मैंने उन्हें धर्य धरने को कहा। उन्होंने धर लिया।

मेरे यशोगान में बताया जा रहा था कि- वे बहुआयामी कलाकार हैं अत: पूरे प्रदेश के गौरव हैं। बाद में देश के भी हो जाएंगे। नाक से शहनाई बजने में ये सिद्धहस्त हैं। फिल्मी तर्जो पर भगवती जागरण के भजन गाने में इनका कोई सानी नहीं है। ये औरत-मर्द दोनों आवाजों में मन्ना डे और लता जी के समान हैं। पेट पर थापें मारकर तबलावादन की इनकी विशिष्ट शैली है। नाक में बीड़ी फंसाकर गले तक पेटीकोट बांधकर इनका शास्त्रीय नृत्य लोक परम्परा का दुर्लभ खंडहर है। इस महान कलाकार का एक और कमाल है कि ये अपनी मूछों में घुंघरू बांधकर कथक करते हैं। पेट में थापें मारकर संगत करने का इनका घराना ये खुद हैं। आज इस महान कलाकार ने अपने सम्मान की एवज में मुख्यमंत्री के पैर छुए। उनकी ये कला ही उन्हें सरस्वती देवी का महान साधक सिद्ध करती है।

इसके बाद दजर्न-दो दजर्न ऊंघती हुई तालियां बजीं। सहसा मुझे अपने बाप याद आए। वे मुझे टोकते रहते थे कि- मियां कब तक भड़ैती करते रहोगे। कुछ पढ़ो-लिखो। टाइपिंग सीखो। मेरे पिता नादान थे, उन्हें क्या पता था कि एक दिन मेरी भड़ैती मुझे प्रदेश गौरव सिद्ध करेगी। इसी पैसे से बाप का कर्ज उतारूंगा, अपने खेत छुड़वाऊंगा। बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाऊंगा। पत्नी को नैनीताल घुमाऊंगा। मेरी आंख खुल गई। निरा सपना था मेरा सम्मान। बच्चे मुझसे स्कूल की फीस मांग रहे थे। बीवी अपने फटे ब्लाउज सी रही थी। सामने अखबार में सम्मान समारोह की फोटो छपी थी। फोटो में मैं नहीं था।

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