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आखिर जनता दिवस कब मनाएंगे

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में जेल में बंद ‘नेशनल काउंसिल ऑफ वूमेन इन इंडिया’ की महासचिव, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी की रिहाई पर कांग्रेस मुख्यालय में किस प्रकार जश्न मनाया गया व रिहाई के दिन को विजय दिवस भी मनाया जा रहा है। एक नारी के प्रति दूसरी नारी की अभद्र टिप्पणी में कार्यकर्ताओं को कौन सी जंगजीतती दिखाई दे रही है? विजय दिवस, शौर्य दिवस या इंसाफ दिवस से भला राज्य की जनता को क्या फायदा होगा? फायदा तो तब है जब राज्य की सभी पार्टियां टांग खिंचाई दिवस को त्याग कर जनता का भला सोचें।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

दिल्ली मेट्रो से उम्मीदें

आपका सम्पादकीय ‘मेट्रो का मूल्यांकन’ पढ़ा। यह सही है कि दिल्ली मेट्रो को श्रीधरन जैसे विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा वाले इंजीनियर का नेतृत्व मिला हुआ है और उनकी निगरानी में दिल्ली को एक समयबद्ध क्रमानुसार रफ्तार मिलने की भी पूरी आशाएं हैं, मगर मेट्रो रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को दोष रहित जरूर होना चाहिए। जमरुदपुर का हादसा यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं चूक जरूर हो रही है। श्रीधरन जी ने भी यह माना कि जनमाल का नुकसान डिजाइन फाल्ट के कारण हुआ और एक आला इंजीनियर का ट्रांसफर भी हुआ। देवता तो कोई भी नहीं होता मगर कुछ ऐसे विरले ख्यातिप्राप्त व्यक्ति जरूर होते हैं, श्रीधरन जैसे, जिनसे आम लोगों की ज्यादा उम्मीदें होती हैं। अगर श्रीधरन जैसे सर्वे-सर्वा इंजीनियर से कोई जवाब मांगा जाए तो यह उनका दानवीकरण कैसे हुआ?

डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली

चमक रहा है इंडिया

इंडिया अब चमकने लगा है। इसके लिए हम गरीब एवं व्यवसायी वर्ग की ओर से सरकारी तंत्र को बधाई। सरकार ने अपने तंत्र के सभी कर्मचारियों का वेतन 20,000 से ऊपर कर दिया है। उसी अनुपात में व्यवसायी वर्ग ने रोजमर्रा के सामान आटा, दाल, सब्जी के दाम निर्धारण कर दिये हैं। इस अर्थवादी युग में विकास का जो पैमाना है, वह यह है कि आपकी जेब कितने उच्च मूल्य पर चीजों को खरीद सकती है। जिस आलू को कल तक गरीब से गरीब भी दो रुपये में एक किलो खरीदता था, वह आज 19 रुपये में मिलने लगा है। 

एस.एस.राय, इन्द्रानगर, देहरादून

इनके लिए अलग कानून

20 जुलाई अंक में पढ़ा आईएफएस अफसर के घर में रह रहे 12 वर्षीय घरेलू नौकर की संदेहास्पद परिस्थिति में मौत हो गई। जब रक्षक ही भक्षक हों तो यही होगा। कैसे एक 12 वर्ष के बालक को नौकर रखा, क्याअधिकारियों पर नियम कानून लागू नहीं होता? वैसे यदि सर्वेक्षण कराया जए तो पूर्णकालिक नौकर के रूप में बच्चे-बच्चियां ही अधिक मिलेंगे।

यू. सी. पाण्डेय, द्वारका, नई दिल्ली

 

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