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निजीकरण के खिलाफ बिजलीकर्मियों ने किया कार्य बहिष्कार

कानपुर व आगरा शहर में बिजली सप्लाई का काम निजी हाथों में सौंपने के पावर कापरेरेशन के फैसले के खिलाफ बिजलीकर्मियों ने गुरुवार को पूरे प्रदेश में कार्यबहिष्कार किया। बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि वह 24 जुलाई को आंदोलन के अगले कार्यक्रमों की घोषणा करेगी। समिति के मीडिया संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि कार्यबहिष्कार में 45 हजार इंजीनियरों व कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

समिति ने कहा है कि बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो इसके लिए ट्रांसमिशन व उत्पादन से जुड़े बिजलीकर्मियों को कार्यबहिष्कार से अलग रखा गया था, लेकिन अगर कानपुर व आगरा में फ्रेंचाइजी तैनात कर निजी हाथों को सप्लाई का काम सौंपने का फैसला वापस न हुआ तो निर्णायक संघर्ष होगा। इसकी घोषणा 24 जुलाई को की जाएगी।

संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजली इंजीनियर व कर्मचारी सूखे के हालात से प्रभावित संकट में बिजली व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं लेकिन फ्रेंचाइजी बनाने के नाम पर टकराव का माहौल बनाया जा रहा है। इसे प्रदेश के हित में प्रबंधन की ओर से टाला जाना चाहिए।

दुबे समेत समिति के प्रमुख पदाधिकारियों एके सिंह, चंद्र प्रकाश अवस्थी, गिरीश पांडेय, सदरूद्दीन राना, आलोक सिन्हा, पीके दीक्षित, सव्रेश द्विवेदी, ओपी पांडेय, बदरूद्दीन ने शक्ति भवन परिसर में सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कानपुर और आगरा दोनों जगहों पर पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष राजस्व वसूली बढ़ी है।

उसके बावजूद टोरेन्ट कंपनी को फ्रेंचाइजी बना कर काम सौंपने का फैसला टकराव पैदा करने की कोशिश है जिसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार है। दुबे ने बताया कि सभी बिजली परियोजनाओं व जिला मुख्यालयों पर विरोध सभाएँ हुईं।  

 

 

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