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मुख्य दरों में बदलाव की संभावना नहीं

मुख्य दरों में बदलाव की संभावना नहीं

बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता और ऋण की कम मांग को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति की त्रैमासिक समीक्षा में प्रमुख दरों से छेड़छाड़ की संभावना कम ही है।

बैंकरों का कहना है कि समीक्षा में केंद्रीय बैंक सरकारी उधारी कार्यक्रम के लिए और स्पष्ट खाका पेश कर सकता है। साथ ही वित्तवर्ष 2010 के लिए जीडीपी एवं मुद्रास्फीति अनुमान में बढ़ोतरी की संभावना है। यूको बैंक के अध्यक्ष एस के गोयल ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता है, मौजूदा नीति में किसी कटौती की संभावना नहीं है। बैंक रेपो तथा रिवर्स रेपो दर को अपरिवर्तित छोड़ सकता है।

गोयल ने कहा कि बाजार के कठिन हालात को देखते हुए केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए गैर निष्पादित आस्तियों संबंधी नियमोंमें ढील दे सकता है। इसी तरह ऋण पुनर्गठन की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे नितसुरे ने कहा कि रिजर्व बैंक, बैंकों के लिए ऋण तथा जमा लक्ष्यों में कमी करसकता है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में इन्हें हासिल करना कठिन होगा। केंद्रीय बैंक ने वार्षिक मौद्रिक नीति में बैंकों के लिए ऋण लक्ष्य 20 प्रतिशत तथा जमा आधार लक्ष्य 18 प्रतिशत तय किया था।

नितसुरे ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों के मद्देनजर केंद्रीय बैंक के पास इस वित्त वर्ष के लिए जीडीपी और मुद्रास्फीतिलक्ष्यों की समीक्षा कर इन्हें क्रमश: 6-6.5 प्रतिशत और पांच प्रतिशत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रणाली में अधिशेष तरलता को ध्यान में रखते हुए प्रमुख दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है।

कोटक महिंद्रा बैंक के समूह प्रमुख (खुदरा देनदारी) के वीएस मनियन ने कहा कि बैंकों पर से दबाव घटाने के लिए केंद्रीय बैंकअनेक कदम उठा सकता है। इसमें ऋण पुनर्गठन सुविधा को दिसंबर तक बढ़ाना शामिल है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने हाल ही में कहा था कि बैंक का प्रयास स्थिर और नरम ब्याज दर प्रणाली सुनिश्चित करना है।

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