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हिन्दी अकादमी में अशोक चक्रधर पर विवाद

हिन्दी अकादमी में अशोक चक्रधर पर विवाद

हिन्दी के सुप्रसिद्ध हास्य कवि अशोक चक्रधर को हिन्दी अकादमी (दिल्ली) का उपाध्यक्ष बनाए जाने के विरोध में अकादमी की संचालन समिति की सदस्य एवं प्रसिद्ध लेखिका अचर्ना वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है।

संचालन समिति के कुछ और सदस्यों ने वर्मा का समर्थन करते हुए कहा है कि अगर चक्रधर ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली तो वे भी इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन कुछ सदस्यों ने इस विवाद पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार किया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिन्दी की प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने अपने पत्र में चक्रधर को विदूषक की संज्ञा देते हुए कहा है कि चक्रधर की अगुवाई में कामकाज अकादमी की अवमानना और उपेक्षा करना है। इसलिए उन्हें वर्मा संचालन समिति से मुक्त कर दिया जाए।

संचालन समिति के एक अन्य सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद तिवारी ने कहा कि हम चक्रधर के कामकाज को देख रहे हैं, लेकिन अगर भविष्य में उन्होंने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं लाया तो संचालन समिति के अन्य सदस्य भी इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम वर्मा के दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।

संचालन समिति के सदस्य एवं प्रसिद्ध आलोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी का कहना है कि दिल्ली में कई ऐसे महत्वपूर्ण लेखक हैं जो अकादमी के उपाध्यक्ष बन सकते थे। उन्होंने कहा कि चक्रधर को हम लोग समय देना चाहते है। देखते है. वह क्या करते हैं। अगर वह मंचीय कविता की फूहड़ संस्कृति अकादमी में भी लाते है, तो हम कोंई न कोई कदम जरूर उठाएंगे।

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