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सौमिक की बहादुरी को सलाम

सौमिक की बहादुरी को सलाम

आज बात करते हैं एक ऐसे साहसी सैनिक की, जिसके हौसले के आगे बदमाश अपनी कोशिशों में नाकाम होकर भाग खड़े हुए। घटनास्थल है उत्तर प्रदेश की  राजधानी लखनऊ के गोमती नगर का विभव खंड।

16 मार्च, 2008 को श्रीमती प्रवीणा मिश्र अपने 13 वर्षीय बेटे को दंत चिकित्सक के यहां ले जा रही थीं। मां-बेटे अपने घर से अभी कुछ दूर तक ही पहुंचे थे कि एक मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक उनके आगे-पीछे मंडराने लगे। प्रवीणा को शक हुआ कि कहीं वो बदमाश स्नैचर न हों।

ऐसा सोच उन्होंने अपने गले में पड़ी सोने की माला उतार कर पर्स में रख ली। यह देख युवकों ने अपनी मोटरसाइकिल उनके नजदीक रोक दी। पीछे बैठे युवक ने एक पिस्तौल निकाली और उसे तान कर श्रीमती मिश्र को अपना पर्स देने को कहा। ऐसा न करने पर बदमाशों ने उनसे पर्स छीनने का प्रयास किया। यह देख कर बेटा, जिसका नाम सौमिक था, पीछे बैठे बदमाश पर झपटा और उससे भिड़ गया।

उस बदमाश ने सौमिक की बांह मरोड़ने की कोशिश की, तब सौमिक ने उसकी बांह में जोर से काट लिया। सौमिक को जान से मारने की धमकी देते हुए बदमाश ने उसके सिर पर पिस्तौल की मूठ से जोरदार वार किया।  गहरी चोट खाने के बावजूद सौमिक बदमाश से उलझा रहा। राह पर चलते लोगों को आते देख मां-बेटे मदद के लिए चिल्लाने लगे।

यह देख कर बदमाश भाग खड़े हुए। सौमिक व उसकी मां ने मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई।  सौमिक के अदम्य साहस के आगे बदमाशों का इरादा नाकामयाब हो गया। इस निडरता व साहस के लिए सौमिक को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया। उपराष्ट्रपति महोदय ने उसे विशेष रूप से सराहा व ‘संजय चोपड़ा पुरस्कार’ प्रदान किया। 

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