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सेलवारसा पत्मनाथन बने लिटटे के नये प्रमुख

सेलवारसा पत्मनाथन बने लिटटे के नये प्रमुख

तमिल ईलम के लिये अपना अभियान पूरा करने का संकल्प करते हुए लिटटे ने बुधवार को एक कथित हथियार तस्कर सेलवारसा पत्मनाथन को वेलुपिल्लई प्रभाकरण के बाद संगठन का नया प्रमुख घोषित कर दिया। प्रभाकरण और विद्रोहियों के पूरे नेतत्व का श्रीलंका सेना के अभियान में खात्मा हो चुका है।

गत मई में श्रीलंका सेना के हाथों तमिल अलगाववादी संगठन का वस्तुत: सफाया होने के बाद लिटटे ने कहा है कि वह अपने संघर्ष की रणनीतियों में बदलाव करेगा लेकिन वह स्वतंत्र तमिल ईलम हासिल करने की दिशा में काम करना जरी रखेगा। प्रभाकरण हमेशा तमिल राष्ट्र का नेता बना रहेगा। यह घोषणा इन रिपोटरें के बीच आयी कि लिटटे के बचे हुए नेतत्व के बीच मतभेद गहरा गये हैं। यह नेतत्व विदेशों में है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सभी तमिल प्रवासी 54 वर्षीय पथमंथन का समर्थन करेंगे।

लिटटे का एक वक्तव्य कहता है, लिटटे की कार्यकारी समिति अपनी प्यारी तमिल जनता तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह बता देना चाहती है कि हमारे राष्ट्रीय नेता की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों के प्रमुख नियुक्त किये गये सेलवारसा पत्मनाथन अब हमारे स्वतंत्रता संघर्ष के भविष्य के कदमों का हमारे सम्मानित नेता के दष्टिकोण के अनुरूप नेतत्व करेंगे।

अज्ञात स्थान से जरी इस वक्तव्य में कहा गया, अन्य मुक्ति संघर्षों की तरह हम संघर्ष के स्वरूप तथा रणनीतियों को समय तथा मांग के अनुरूप बदलेंगे। इसके बावजूद, स्वतंत्र तमिल ईलम का हमारा अंतिम उददेश्य कभी नहीं बदलेगा। कुमारन पत्मनाथन या केपी के नाम से पहचाना जने वाला यह नेता लिटटे का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता था और उसे प्रभाकरण ने गत मई में श्रीलंका सेना के हाथों मारे जने से कुछ ही महीने पहले अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों का प्रमुख बनाया था।

उसने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी तंत्र कथित तौर पर चलाया था। श्रीलंका सरकार ने दूसरे देशों की सरकारों से उसे तलाशने तथा गिरफ्तार करने की अपील की थी। केपी द्वीप राष्ट्र के उत्तर में सेना के अभियान में प्रभाकरण के मारे जने की पुष्टि करने वाला लिटटे का पहला नेता था। उसने श्रीलंका के विद्रोहियों पर जीत की घोषणा करने के करीब एक महीने बाद अस्थायी अंतरराष्ट्रीय तमिल ईलम सरकार की घोषणा की थी।

पत्मनाथन ने कथित तौर पर कहा था, अस्थायी अंतरराष्ट्रीय तमिल ईलम सरकार राजनीतिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करेगी और अंतरराष्ट्रीय परिदश्य में तमिल ईलम की जनता की आवाज होगी। उसने कहा था, ईलम तमिल जनता हमारे राष्ट्र तमिल ईलम के लिये चल रहे संघर्ष के इतिहास के महत्वपूर्ण तथा दु:खभरे दौर से गुजर रही है। कोई भी इस तथ्य को नकार नहीं सकता कि हमने वह बड़ा तथा अपूरणीय नुकसान उठाया है जो कभी हमें सपने में भी स्वीकार्य नहीं था।

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