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दाल के नखरे कम न होंगे

दाल के नखरे कम न होंगे

राजधानी में 90 रुपये प्रति किलोग्राम की आसमान की ऊंचाई पर पहुंच चुके दालों के दाम अभी नीचे आने की संभावना नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि श्रावण माह में पवरें की वजह से दालों की मांग में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में अगस्त के अंत तक दालों की कीमतों में तेजी बनी रहने का अनुमान है। वर्षा न होने के कारण सब्जियों के दाम बढ़ने से भी दालों की कीमतों को शह मिल रही है।

दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, नया बाजार के महासचिव ने कहा कि दिल्ली में पिछले तीन-चार महीनों से दालों की कीमतों में तेजी आई है। लेकिन जुलाई में दालों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं क्योंकि श्रावण के महीने की वजह से दालों की मांग बढ़ गई है।

गुप्ता ने कहा कि सब्जियों की कीमतों में आए उछाल से स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने कहा कि दालों का उत्पादन कम रहने से भी कीमतों पर दबाव बना है। श्रावण का महीना उत्तर भारत में आठ जुलाई से शुरू हुआ है, जो पांच अगस्त तक चलेगा। दक्षिण के आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह 23 जुलाई को शुरू होकर 20 अगस्त तक चलता है। इस पवित्र महीने में ज्यादातर हिंदू मांस और मछली नहीं खाते हैं।

दिल्ली के एक व्यापारी ने बताया कि दिल्ली में रोजना मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से 2,000 टन दालों की आवक होती है।राष्ट्रीय राजधानी में इस समय खुदरा बाजार में दालों के दाम 40 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहे हैं। मध्य दिल्ली में तुर दाल (अरहर) का दाम 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मसूर का दाम 62 रुपये प्रति किलोग्राम, मूंग 60 रुपये, उड़द 52 रुपये और चने की दाल का दाम 42 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। वहीं, दक्षिण दिल्ली में अरहर 82 रुपये प्रति किलोग्राम, मसूर 72 रुपये, मूंग 70 रुपये, चना 48 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।

पूर्वी दिल्ली में अरहर तो खुदरा बाजार में 90 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। यहां मूंग 80 रुपये, मसूर 75 रुपये, उड़द 80 रुपये और चना दाल 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जा रही है। पश्चिम दिल्ली में अरहर की कीमतें 84 रुपये प्रति किलोग्राम, मसूर और मूंग 66 रुपये प्रति किलोग्राम, उड़द 56 रुपये और चना दाल 38 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिक रही है। भारत में दालों का उत्पादन 2008-09 के सत्र में घटकर 1.466 करोड़ टन रहा गया है, जो इससे पिछले वर्ष के दौरान 1.476 करोड़ टन रहा था। सरकार आयात के जरिये घरेलू स्तर पर मांग बढ़ा रही है।  

 

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