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नौकरों के सत्यापन में पुलिस खामोश

दिल्ली के कालकाजी मामले में नौकर का सत्यापन काम आया और दिल्ली पुलिस ने व्यवसायी विजय खेमका के पोते मासूम रितविक को सकुशल बरामद करने में सफल रही। इधर नोएडा पुलिस घरेलू नौकरों के सत्यापन की बात तो करती है लेकिन सत्यापन कराने में वह पूरी तरह से खामोश है। सर्वेट बेरीफिकेशन सेल गठित कर महज खानापूर्ति कर रही है। पुलिस की लापरवाही के कारण एक सत्यापन कराने में उन्हें तीन से छह महीने का समय लग जा रहा है। ऐसे में यदि किसी नौकर ने वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया तो उस तक पहुंच पाना नामुकिंन होगा। और पुलिस हाथ-पर हाथ धरे बैठी रह जाएगी।


हाईटेक सिटी में घटित कई घटनाओं में घरेलू नौकरों की भूमिका पाई गई थी। घटना के बाद पुलिस के आलाधिकारी जोर-शोर से नौकरों का सत्यापन कराने की बात करते रहे। सत्यापन कराने के लिए अफसरों ने पुलिस बेरीफिकेशन सेल का गठन किया। कुछ दिनों तक बेरीफिकेशन का फार्म जोर-शोर से वितरित किया गया लेकिन जांच के नाम पर रिजल्ट शून्य रहा। आंकड़ों पर गौर करें तो 1 सितम्बर 08 से शुरू हुए बेरीफिकेशन में 149 नौकरों के फार्म जमा किये गये हैं। जिनमें अब तक महज 67 नौकरों का ही सत्यापन हो पाया है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस नौकरों के सत्यापन को लेकर कितनी गंभीर है। यहां रहने वाले पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के यहां बड़ी संख्या में घरेलू नौकर काम करते हैं । इनमें अधिकांश बिहार और पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। बावजूद पुलिस उनका वेरीफिकेशन कराने के लिए गंभीर नहीं है। घटना होने के बाद पुलिस दो-चार दिन हरकत में आती है लेकिन समय बीतने के साथ-साथ वह भी पुराने ढर्रे पर काम करने लगती है।


लंबी है सत्यापन की प्रक्रिया- बेरीफिकेशन से जुड़े एक पुलिसकर्मी का कहना है कि यहां बिहार के करीब 65 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल 35 प्रतिशत लोग कोठियों में काम करते हैं। नौकरों के सत्यापन का फार्म भरने के बाद एसपी सिटी के यहां से डाक एसएसपी के यहां पहुंचती है और फिर वहां से संबंधित जिलों के पुलिस प्रमुखों के  यहां भेजा जाता है। वहां से जांच संबंधित थानों में भेजी जाती है। यह प्रक्रिया पूरी होने में तीन से छह माह तक का समय लग जाता है। उक्त पुलिसकर्मी का कहना है कि कई बार ऐसा होता है कि संबंधित जनपदों को दो-तीन बार रिमाइंडर भेजना पड़ता है।


क्या कहते हैं अधिकारी- सुरक्षा का दावा करने वाले एसएसपी और एसपी सिटी लोगों को ही नौकरों का सत्यापन कराने की नसीहत देते फिरते हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या में पुलिस बल न होने के कारण जल्दी सत्यापन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लोगों को खुद सत्यापन करके ही नौकर रखना चाहिए। विभाग पर वर्कलोड की अधिकता के कारण अन्य कार्य प्रभावित हो जाते हैं।

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