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यूजीसी का यूनिवर्सिटीज को आर्थिक मदद का प्रपोजल

रैगिंग की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए नियम-कानून सख्त करने के बाद अब यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने यूनिवर्सिटीज को आर्थिक मदद देने की पेशकश की है। यूजीसी की ओर से इस आशय का पत्र सभी यूनिवर्सिटीज को भेजा जा चुका है। यूजीसी ने विश्व विद्यालयों को कहा है कि प्रथम तीन महीने में रैगिंग की घटनाएं आम होती हैं, ऐसे में यूनिवर्सिटी अगर कोई विशेष व्यवस्था करती है और इस बाबत खर्च अधिक होता है तो यूजीसी आर्थिक मदद मुहैया कराएगी। इस पत्र में यह भी साफ किया गया है कि रैगिंग रोकने में अगर कोई यूनिवर्सिटी विफल होती है तो उस यूनिवर्सिटी को यूजीसी की ओर से दी जाने वाली ग्रांट रोक दी जाएगी।

पीयू ने मांगे 100 सुरक्षाकर्मी
यूजीसी की ओर से आर्थिक मदद का प्रस्ताव मिलने के बाद पीयू ने अपने स्तर पर तैयारी की है। पहले तीन महीने के लिए पीयू ने 100 सुरक्षाकर्मियों का वेतन मांगा है। ये सभी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी पीयू में रैगिंग रोकने के लिए तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा एक वन-ड्राइवर के लिए उनके तीन महीने के किराए-वेतन के लिए भी पीयू यूजीसी से आवेदन करेगा। इसके अलावा एंटी रैगिंग कमेटी में शामिल 15 लोगों को मोबइल फोन की सुविधा भी प्रदान करने की अपील की गई है। मांगों की यह सूची जल्द ही यूजीसी को भेज दी जाएगी।

इनका कहना है
हमें यूजीसी की ओर से रैगिंग रोकने के बाबत आर्थिक मदद मिलने की सूचना मिली है। इस सूचना के आधार पर हमने अपनी ओर से तैयारी की है। जल्द ही मांगों की सूची सौंप दी जाएगी। हमें पूरा विश्वास है कि इस सहायता से रैगिंग व अन्य घटनाओं पर काबू पाने में काफी फायदा मिलेगा।

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