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आइए सीखें सदमे से उबरने की कला

जीवन में प्रत्येक व्यक्ति के साथ अतीत से जुड़ी कई अच्छी और बुरी यादें होती हैं। इन में अच्छी यादें निराशा के समय प्रेरित करती हैं जबकि बुरी यादें हतोत्साहित करती हैं। कभी-कभी यह हताशा इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति डिप्रेशन में जा पहुंचता है। लेकिन मनोविश्लेषकों का मानना है कि यह किसी व्यक्ति पर ही निर्भर करता है कि वह अपनी बुरी यादों को अपने दिलो-दिमाग पर हावी न होने दे, लेकिन देखने में आता है कि अतीत जीवियों को अक्सर बुरी यादों को जटिल बीमारियों की तरह झेलना पड़ता है।

सन् 2002 में मांट्रियल में ड्राइविंग के दौरान रीता मेगिल के साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिसकी याद उनके दिल में आज तलक ताजा हैं। मेगिल ने देखा कि रेड लाइट क्रॉस करती हुई एक कार तेजी से दनदनाती हुई उनके सामने आ रही है। उसने तेजी से ब्रेक लगाए, लेकिन वह जानती थीं कि देर हो चुकी है। एकबारगी तो उन्हें ऐसा लगा कि अब बचने की कोई उम्मीद नहीं। तेजी से आती कार की टक्कर से उनकी कार रोड के दूसरी तरफ चली गई और सीमेंट के पिलर से बनी बिल्डिंग से जाकर टकरा गई। लेकिन इसे वह ऊपर वाले का शुक्र मानती हैं कि वह जीवित हैं। दुर्घटना में मेगिल की दो पसलियां और कॉलरबोन टूट गई, पर इस दुर्घटना की वजह से वह पोस्ट ट्राउमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (पीटीएसडी) का शिकार हो गई।

भूली नहीं वो यादें
मेगिल कहती हैं कि मैं रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे कुकिंग, शॉपिंग करती हूं, लेकिन न जाने मेरे दिमाग में वह यादें बार-बार कैसे आ जाती हैं। वह कहती हैं कि मेरा दिल अकसर तेजी से धड़कने लगता है, मुझे बेहद पसीना आता है। कभी-कभी तो ये हताशा इतनी बढ़ जाती है कि मैं डिप्रेशन में आ जाती हूं।

क्या है पीटीएसडी
दुर्घटना या किसी हमले के बाद अधिकांश लोग इसके सदमे से उबर नहीं पाते। उस दिन की बातें जेहन में बार-बार आती रहती हैं। मैक्गिल विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक एलेन ब्रुनेट कहते हैं कि पीटीएसडी मेमोरी डिसॉर्डर है। वह कहते हैं कि यह आप पर निर्भर करता है कि आप क्या भूलना चाहते हैं? और क्या नहीं भूलना नहीं चाहते? दुर्घटना के कुछ वर्षो बाद मेगिल ने ब्रुनेट का एक्सपेरीमेंटल एड का विज्ञापन देखा और वह उनके पास इलाज के लिए गई। उन्होंने कॉमन ब्लड प्रेशर के इलाज की लो डोज प्रोपेरानॉल लिया जो मेंडुला की गतिविधियों को कम करता है, मेंडुला दिमाग का वह हिस्सा होता है जो भावों पर नियंत्रण रखता है। दवाई के सेवन से उसकी वास्तविक और भावनात्मक मेमोरी के बीच का लिंक टूट गया। प्रॉपेरानॉल ने एड्रेनलीन के एक्शन को ब्लॉक कर दिया जिसने उसे तनाव और बेचैनी से निजात दिलाई। मेगिल के शरीर में ड्रग होने के बाद भी उसको इस बात का इल्म था कि वह दुर्घटना की शिकार हुई थी। ब्रुनेट ने इस आधार पर निष्कर्ष निकाला कि हम अपनी यादों का स्मरण करके ही उनमें सुधार कर सकते हैं। यह ब्रुनेट की न्यूरोसाइंस की विवादास्पद और चौंकाने वाली खोज थी। मैक्गिल के करीम नादेर कहते हैं कि पीटीएसडी से पीडि़त लोग अपना इलाज मेमोरी की एडिटिंग करके कर सकते हैं।

कैसे बनती है मेमोरी 
न्यूरोवैज्ञानिकों ने मेमोरी का न्यूरल आर्केटेक्चर के आधार पर अध्ययन किया।19वीं सदी में न्यूरोएंटोनॉमिस्ट सेंटियागो रेमोनी केजल ने अध्ययन किया कि इन्फॉरमेशन हमारे सिर में प्रत्येक समय वैद्युत इंपल्स के रूप में ट्रेवल करती है। मेमोरी का निर्माण और इसमें सुधार किया जा सकता है। कई सदियों से एपिसोडिक मेमोरी का टेक्स्टबुक विवरण काफी पुराना रहा है। मेमोरी के निर्माण के लिए सौ से अधिक प्रोटीन की केमिकल कोरियोग्राफी की जरूरत होती है, लेकिन मुख्य बात यह है कि सेंसरी इन्फॉरमेशन को इलेक्ट्रिकल इंपल्स के आधार पर कोड किया जाता है। कई प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल मेमोरी के केंद्र, बादाम आकार के मेंडुला और केले के आकार वाले हिप्पोकैंपस में पहुंचते हैं।

न्यूरोवैज्ञानिकों का मानना है कि मेमोरी का निर्माण तब होता है, जब रोजमर्रा के सेंसरी अनुभवों के आधार पर दिमागी संरचना में मौजूद न्यूरॉन ग्लूटामेट (दिमाग का मुख्य न्यूरोट्रांसमीटर) और इलेक्ट्रिकल इंपल्स के द्वारा एक्टिवेट होते हैं। सेंसरी अनुभवों के द्वारा बायोकेमिकल्स ट्रिगर होते हैं और कैल्शियम आयन कोशिकाओं की पूर्ति करते हैं। आयन दर्जनों एंजाइम को उकसाता है जो अतिरिक्त रिसेप्टरों को खोलकर कोशिकाओं का पुनर्निर्माण करता है और अधिक सिनेप्सेज का निर्माण करता है। हालांकि इन परिवर्तनों में समय लगता है और कुछ समय तक तो मेमोरी गीली कंक्रीट की तरह होती है।

किताबों में न्यूरोवैज्ञानिकों ने मेमोरी का जिक्र, वैसे ही किया है, जैसे जियोसाइंटिस्ट पहाड़ों के बारे में करते हैं।

इलाज की तकनीक

रीता मैगिल को एक दिन में प्रोपेनॉल की दो खुराक दी गई। शोधकर्ताओं ने माना कि परिणाम उत्साहित करने वाले थे। शोधकर्ताओं ने देखा कि जब तक दवाई रीता के शरीर में थी, तब तक उसकी हृदय गति और मांसपेशियां बेहतर अवस्था में थीं।

हारवर्ड के शोधकर्ता रोजर पिटमैन ने पीटीएसडी से ग्रसित 45 लोगों पर प्रयोग किए। जिन लोगों पर ये प्रयोग किए गए, वह काफी लंबे समय से इस समस्या से पीडि़त थे, लेकिन इस दवाई के सेवन के बाद उनमें तेजी से सुधार देखने में आया। बेचैनी, फोबिया और किसी चीज का आदी होना भी इमोशनल मेमोरी डिसॉर्डर होता है।

कैसे बाहर निकलें बीमारी से

न्यूरोवैज्ञानिक कहते हैं कि मेमोरी में लगातार सुधार होता रहता है। जब आप पुरानी यादों के बारे में सोचते हैं, तो सामान्यत: उसमें लगातार सुधार करने की कोशिश करते रहते हैं। मनोवज्ञानिकों का कहना है कि सदमे से उबरने के लिए रिकंसोलिडेशन बेहतर तरीका है। वो कहते हैं कि सीधे शब्दों में कहा जाए, तो जितना ज्यादा आप मेमोरी का इस्तेमाल करेंगे, उतने बेहतर तरीके से ही आप इसमें सुधार कर पाएंगे। मनोवज्ञानिकों का कहना है कि अकसर लोग सदमे से उबरने के लिए शराब जैसी चीजों का सहारा लेते हैं या फिर अन्य नकारात्मक उपाय अपनाते हैं जो शारीरिक रूप से तो नुकसान देता ही है, मानसिक रूप से भी परेशान करता है। ऐसे में बेहतर यही है कि रिकंसोलिडेशन तरीके को अपनाया जाए। जैसा कि हमने बात की है कि दिमाग में यह क्षमता होती है कि जरूरत की जानकारी को रखता है और गैर जरूरी जानकारी को भुला सकता है। मोटे तौर पर कहा जाए तो सदमे की स्मृतियों से उबरना मुमकिन है।

साभार : डिस्कवर

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