DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पर्सनेलिटी डिसॉर्डर

मल्टीपल पर्सनालिटी डिसॉर्डर मुख्यत: किसी सदमे या बचपन में हुई किसी दुर्घटना की वजह से होता है। जब लोग लंबे समय से सदमे से उबर नहीं पाते, तो वह इस बीमारी की वजह बनता है। अकसर लोग इस बीमारी को सिजोफ्रेनिया से जोड़कर देखते हैं। ध्यान रखने वाली बात है कि यह दोनों बीमारियां पूरी तरह अलग हैं। फिल्म और कहानियों में मल्टीपल पर्सनेलिटी डिसॉर्डर के मरीजों को खूंखार किस्म का दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता इससे पूरी तरह अलग होती है।

लक्षण : मल्टीपल पर्सनेलिटी डिसॉर्डर में लोगों को समय का ज्ञान नहीं होता। उन्हें ये एहसास तक नहीं होता कि समय बीत चुका है। इसके अलावा इस बीमारी के प्रमुख लक्षण डिप्रेशन, फोबिया, संशय में पड़ना, बेचैनी, आत्महत्या करने, नशे के लती बन जाते हैं। इसके शिकार लोग अपनी त्वचा काट लेते हैं। उन्हें शरीर में तेज दर्द की शिकायत होती है, साथ ही ईटिंग डिसॉर्डर और सिरदर्द होने की दिक्कतें भी होती हैं।

इलाज : मल्टीपल पर्सनेलिटी डिसॉर्डर के इलाज की प्राथमिक चिकित्सा थेरेपी है। इस बीमारी के ट्रीटमेंट के लिए प्ले थेरेपी, टॉक थेरेपी, हिप्नोसिस थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। सामान्यत: मनोचिकित्सक इस रोग के इलाज के लिए मेडिकेशन को तरजीह नहीं देते। इलाज के दौरान ये कोशिश की जाती है कि व्यक्ति वास्तविक जीवन को सदमे से जोड़कर न देखें। थेरेपी एक लंबी प्रक्रिया है, ऐसे में इस बीमारी के इलाज में लंबा समय लग जाता है। क्लीनिकल रिसर्च से जुड़े लोग भी ये ताकीद करते हैं कि अगर लगातार थेरेपी कराई जाए, तो इस बीमारी का इलाज संभव है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पर्सनेलिटी डिसॉर्डर