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झमाझम बारिश की आस टूटी, किसानों के सामने आपात घड़ी

सावन मास का पहला पखवारा बीत गया लेकिन ‘बरखा’ ने इसका अहसास ही नहीं होने दिया। अब आसमान में घिरने वाले बादलों पर दगाबाज का ठप्पा लग गया है। बुधवार को सूर्य का ग्रहण छँटने के बाद आसमान में बादल कुलांचे मारते रहे लेकिन मन मयूर तरस कर रह गए। दोपहर बाद कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा हुई लेकिन शहर में चन्द क्षण की फुहारों ने ललचा कर ठेंगा दिखा दिया। अब तो मौसम विशेषज्ञ निराश हो चुके हैं और किसानों के सामने आपात घड़ी आ खड़ी हुई है। मानसून का पूरा एक महीना बीत गया लेकिन पानी से मन नहीं भीगा। धीरे-धीरे सावन भी रास्ता तय करता जा रहा है लेकिन आसमान से अब तक चार घंटे की भी बारिश नहीं हुई।


मानसूनी बारिश के लिए ललचाने वाले कजरारे मेघ बुधवार को भी घुमड़ कर छाए लेकिन कहीं हल्की बरसात तो कहीं फुहारें मार कर ठहर गए। सुबह सूर्य ग्रहण का अंधेरा भी गर्मी से मुक्ति नहीं दिला सका। दिन भर पुरवाई हवा चलने और चटख धूप ने उमस भी बढ़ा दिया। तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया लेकिन दोपहर में पारा 37 डिग्री सेल्सियस पर पहुँच गया। नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय के शस्य वज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार सिंह कहते है कि अब अच्छी बरसात की आस खत्म हो चुकी है। किसानों को इस आपात काल से निपटने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी। किसान कुछ हासिल करने के लिए अब धान की सीधी बुवाई करें और वही फसल उत्पादन की सोचें जिनमें पानी की माँग कम हो।

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