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मेरी जीवन संगिनी बनना स्वीकार करो

मैं आपके समाचार पत्र के माध्यम से भारत की जनता के सामने राखी सावंत को शादी का प्रस्ताव भेज रहा हूं। प्रिय राखी, मैं पहले से शादीशुदा तो जरूर हूं पर मैं तुमसे भी शादी निभा सकता हूं। मैं शादी के सारे दुखों से वाकिफ हूं। लेकिन इसके बादजूद मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में हूं। तुम अपने स्वयंवर में आए सभी प्रतिभागियों को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राखी बांध दो तथा मेरी जीवन संगिनी बनना स्वीकार कर लो।

भूरेलाल, नई दिल्ली

सांसद की बात में है दम

दो दिन पूर्व जेडी (यू) के धाकड़ सांसद शरद यादव (जो अनेक बार केन्द्रीय सरकार के मंत्री रहे) ने टीवी पर दिखाए जा रहे सीरियल ‘बालिका वधू’ के प्रदर्शन को बाल विवाह के समर्थन का प्रतीक बताया है। यह आरोप बेबुनियाद नहीं है। यादव की बात में दम है औरसरकार का दायित्व हो जता है कि टाल-मटोल का रवैया छोड़कर जनहित और राष्ट्रहित के मद्देनजर विषय की तत्काल जांच कराए और आवश्यक हो तो सीरियल का प्रदर्शन बंद करे।

भूषण द्विवेदी, गुड़गांव,

सायना बनी एक मिसाल

सायना नेहवाल ने जो उपलब्धि हाल ही में हासिल की है, वास्तव में काबिले तारीफ है। भारत की इस बेटी ने देश का नाम तो ऊंचा किया है। इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। जिस तरह क्रिकेट में धन की वर्षा खिलाड़ियों पर होती है, अगर उसका आधा भाग भी अन्य खेलों के खिलाड़ियों को मिले तो वो भी भारत का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखने की क्षमता रखते हैं। बेहतर तो यह रहेगा कि प्रत्येक बड़ा औद्योगिक घराना एक-एक खेल को गोद ले ले और खिलाड़ियों को सुविधाएं व नौकरियां देकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत के प्रतिनिधित्व को प्रधानता दें, तब हमारा देश भी खेलों की दुनिया में गौरवमय स्थान पा लेगा।

युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव

ईमानदारी हो तो ऐसी

‘शोध नहीं, कार्यक्रम में व्यस्त हैं वैज्ञानिक’ पढ़ा। कमोबेश सभी सरकारी वैज्ञानिकों का यही हाल है। 62 वर्ष की आयु में अवकाश प्राप्त करने तक कोई भी उपलब्धि नहीं होती है। 90 प्रतिशत सरकारी वैज्ञानिकों की यद्यपि पदोन्नति होती रहती है, अपनी तीव्र गति से बीरबल साहनी इंस्टीटयूट की बात हो रही है तो इस वनस्पतिशास्त्री के जीवन से एक वाकया है। एक बार उनका एक शिष्य जोबड़े घर का और पहुंच वाला था पर होशियार और मेहनती नहीं था। बीरबल साहनी पर बहुत जोर दबाव पड़ा कि इसको एक अच्छा प्रमाण-पत्र दिया जाए। पहले तो वे टालते रहे, फिर उन्होंने एक परंपरागत टेस्टीमोनियल लिख दिया ‘..आप बहुत अच्छे हैं। सुंदर हैं। खास बात कि आप बहुत अच्छा गाते हैं अच्छे संगीतज्ञ हैं.. इत्यादि’ पर कहीं ये नहीं लिखा कि ये अच्छे वनस्पति वैज्ञानिक हैं। शिष्य तो प्रमाण-पत्र पाकर खूब खुश हुआ। अब ऐसी ईमानदारी देखने को मिलने से रही।

यू. सी. पाण्डेय, शिवशक्ति, नई दिल्ली

विजय दिवस गर्व से मनाएं

यह बड़े अफसोस और शर्म की बात है कि सरकार कारगिल युद्ध विजय दिवस को मनाने में कोई रुचि नहीं ले रही हैं। सीमा पर कारगिल युद्ध में देश की जीत पूरी तरह सैनिकों की दिलेरी का नतीजा थी। पाकिस्तान को धूल चटाने वाले सैनिकों के सम्मान और शहीदों की याद में कारगिल विजय की दसवीं बरसी पूरे देश में गर्व से मनाई जानी चाहिए।

कमलजीत सिंह, मोहाली

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