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बजट से खफा महिला संगठन

बजट से खफा महिला संगठन

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भले ही 2009-10 के बजट को गरीबों और जरूरतमंदों का बजट कह रहे हों, लेकिन महिला केन्द्रित गैर-सरकारी संगठन इस बजट से खासे असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। गैर-सरकारी संगठन वुमन पावर कनेक्ट(डब्ल्यूपीसी) का कहना है कि यह बजट महिलाओं की उन्नत्ति, आधारभूत अधिकारों, समानता और विकास की योजनाओं को देखते हुए पिछले बजट की तुलना में महिलाओं को कई कदम पीछे ले जाएगा।

वुमन पावर कनेक्ट - द नेशनल वॉयस ऑफ वुमन एण्ड वुमन ग्रुप ऑफ इण्डिया के अनुसार, वित्त मंत्री  प्रणव मुखर्जी ने बजट में महिला और महिला केन्द्रित योजनाओं को लागू करने में काफी कंजूसी की है। उनका आरोप है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बजट में दरकिनार कर दिया गया है, जबकि इसकी तुलना में रेलवे, ऊर्जा, कृषि, रोजगार, पर्यावरण मंत्रालयों को बड़ी संख्या में योजनाओं का लाभ दिया गया है।

हालांकि महिला संगठनों ने राष्ट्रीय महिला कोष समूह में बढ़ोतरी, महिला शिक्षा राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत, स्व सहायता समूह कार्यक्रम में ग्रामीण भारतीय महिलाओं की 50 प्रतिशत सदस्यता और महिलाओं को व्यक्तिगत आयकर छूट में वृद्धि योजना की सराहना की है। महिला संगठनों के अनुसार भारत में महिलाओं की जनसंख्या और बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय विकास की दृष्टि से 2009-10 के बजट को संतोषप्रद नहीं माना जा सकता।
डब्ल्यूपीसी  की अध्यक्ष डॉ. रंजना कुमारी कहती हैं कि भारत सरकार को अन्य मंत्रालयों के समान महिला मुद्दों और लिंग असमानता की समस्या को ध्यान में रख कर महिला संबंधी योजनाओं को बजट में उचित स्थान देना चाहिए था। वहीं डब्ल्यूपीसी की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन हमसा कहती हैं कि देश की सुरक्षा के लिए रक्षा बजट बढमना प्रशंसनीय है। जनसंख्या वृद्धि को रोकना भी आवश्यक है। शिक्षा और लिंग असमानता में सुधार भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। लेकिन लम्बे समय से लिंग समानता की केवल बातें ही हो रही हैं, समाज से लिंग समानता के वादे महज सपने बन कर रह गये हैं।

उनका कहना है कि इस वर्ष जून में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की है। इस योजना को महिला केन्द्रित कार्यक्रमों में सुधार के उद्देश्य से लागू किया गया, लेकिन अफसोस प्रणव मुखर्जी के बजट भाषण में राष्ट्रपति के महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रीय मिशन की कोई भी झलक नहीं दिखी।

वुमन पावर कनेक्ट के अनुसार, उन्होंने बजट से पूर्व सरकार पर दबाव डाला था कि हर वर्ष बजट निर्माण के समय महिला समूहों और संगठनों, संस्थाओं से परामर्श किया जाये, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। उनका कहना है कि डब्ल्यूपीसी ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी बातों को ध्यान में रख मांगों की सूची सरकार को सोंपी थी, लेकिन बजट में बहुत कम मांगों को कार्यन्वित किया गया।

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