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लिव इन जरा संभल कर

लिव इन जरा संभल कर

आज के दौर में लिव इन रिलेशनशिप में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। इस तरह के संबंध समाज का एक हिस्सा बनते जा रहे हैं और इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि लोगों में इस तरह के रिश्तों को लेकर एक स्वीकारोक्ति भी पैदा होती जा रही है। कुछ साल पहले तक इस तरह के संबंधों पर कोई भी खुल कर बातचीत तक करना पसंद नहीं करता था, लेकिन आज लोग लिव इन पर खुल कर बातचीत करते हैं। देखा जाए तो आज की युवा पीढ़ी जिम्मेदारियों से भागती है या यूं भी कह सकते हैं कि वह किसी भी तरह के बंधन में विश्वास नहीं रखती, जिसके परिणामस्वरूप शादी किए बिना ही लड़का व लड़की आपसी सहमति से साथ रहते हैं। वे समाज के रीति-रिवाजों को भूल कर अपनी सहूलियत से अपने कायदे-कानून बनाते हैं, लेकिन साथ ही यह भी सच है कि हर रिश्ते का आधार विश्वास ही होता है। लिव इन में एक आजादी तो होती है, पर लाइफ में पूरी तरह से एन्जॉय नहीं कर पाते, क्योंकि समाज जल्दी से इस रिश्ते को मान्यता नहीं देता। और तो और यह एक ऐसा कमिटमेंट है, जिसे कभी भी तोड़ जा सकता है। ऐसे में दोनों में से किसी एक के बहकने का डर लगातार बना रहता है। कहीं आपका पार्टनर आपको छोड़ न दे इस तरह का डर बना रहता है, जिससे तनाव की स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। अगर आप वाकई में लिव इन पर भरोसा करते हैं तो आपको कुछ बातें खासतौर पर ध्यान रखनी चाहिए जैसे, आपको अपने पार्टनर के साथ एक एग्रीमेंट करना चाहिए व आपको साथ निभाने के लिए ट्रेनिंग लेनी चाहिए और तो और आपको अपने सभी अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए। आपका पार्टनर यदि आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करता है तो उसे रोकने की आप में क्षमता व हिम्मत होनी चाहिए। अपने पार्टनर पर पूरी तरह से भरोसा होना चाहिए व इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि कोई भी निर्णय लेने से पहले आपको उस निर्णय को जीवन भर निभाना पड़ेगा। अगर इस रिलेशनशिप के चलते आपको बीच में ही अकेला रहना पड़े तो उसके लिए भी अपने-आपको पहले से ही मजबूत बना कर रखिए, तभी आप सफल लिव इन रिलेशनशिप को निभा पायेंगे।

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