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दो टूक

चांद और सूरज का कैसा मिलन था यह, जिसने हजारों-लाखों को सोने नहीं दिया? क्यों हजारों मील दूर से लोग इसे देखने भारत पहुंचे? ऐसे सवालों की कोई गुंजाइश न रहती अगर सब लोग आज तड़के घटी इस महाघटना के साक्षी बनते! झट समझ आ जाता कि जिज्ञासा, रोमांच और आनंद से भीगी करोड़ों आंखों ने इस अलौकिक लुकाछिपी में क्या देख लिया!

हमारे सबसे चहेते दो आकाशीय पिंडों का महारास था यह! ब्रह्मांड की सबसे अनूठी रासलीला! अद्भुत, अनुपम और ऐतिहासिक! नटखट चांद का आभासी सम्मिलन समाप्त होना आरंभ होता है और नभ में उभरती है एक हीरे की अंगूठी! आकाशलोक का सबसे अमूल्य आभूषण! कुछ पल के लिए कौंधती है और फिर दशकों के लिए ओझल हो जाती है यह अंगूठी। अतीत में अज्ञान के राहु-केतु वर्तमान के विज्ञान के डायमंड रिंग बन गए! ग्रहण मानव इतिहास के प्राचीनतम साक्षी होते हैं! हमारी समस्त विकास यात्राओं के खगोलीय पर्यवेक्षक! सचमुच कितने विरले होते हैं ये ग्रहण!

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