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स्वीमिंग पूल

इन दिनों स्वीमिंग पूल के शीतल पानी में तैरने का अलग ही मजा है। इससे बदन तो तरो-ताजा होता ही है, मन और आत्मा भी स्फूर्त हो उठते हैं, लेकिन उससे पूर्व कुछ नियम जान लें।

पूल साफ-सुथरा हो : ध्यान रखें कि पूल साफ-सुथरा हो और उसका रखरखाव करने वाली मेनेजमेंट और दूसरे सदस्य इस बाबत पूरा ध्यान रखते हों। उनके द्वारा बरती गई लापरवाही पूल को बीमारियां फैलाने वाले जीवाणुओं का तालाब बना सकती हैं। अगर पूल की साफ-सफाई के प्रति सजगता न बरती जाए तो यह रोगाणुओं का घर बन जाता है। थोड़ा बहुत पानी तैराक केमुंह में चला ही जाता है। नतीजतन इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है।

कैसे रखें साफ : स्वीमिंग पूल को साफ-सुथरा रखने के लिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना हर सदस्य के लिए जरूरी है :

- पूल में दाखिल होने से पहले, अपने बदन को अच्छी तरह साफ करें। सभी स्वीमिंग पूलों पर नहाने के कमरे बने होते हैं।

- पूल में घुसने से पहले लघुशंका और दीर्घशंका से निवृत्त हो आएं। अक्सर स्वीमिंग पूलों में एमोनिया, एल्ब्यूमिनाइड, ऑर्गेनिक और नाइट्रेटों जैसे विलयों का जैविक प्रदूषण पाया जाता है। यह प्रदूषण तैराकों द्वारा व्यक्तिगत सफाई के प्रति लापरवाही बरतने से होता है। 

- अगर कोई छूत की बीमारी लगी हो तो जब तक डॉक्टर इजाजत न दें, पूल में न जांए।

- एक सजग सदस्य के नाते यह सुनिश्चित करें कि पूल के पानी को नियमित रूप से फिल्टर किया जाए, उसमें क्लोरीन मिलाएं और समय-समय पर उसका जीवाण्विक परीक्षण किया जाए।

- फफूंद इन्फेक्शन, जिसके कारण पांवों में दाद होती है तथा पैपिलोमा वायरस के कारण पैदा होने वाले पांवों के बीच के मस्सों से सजग रहें एवं उनसे बचाव का पूरा ध्यान रखें।

- पूल से निकलने के बाद खासकर उंगलियों के बीच के स्थानों को अच्छी तरह सुखा लें।

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