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हैल्थ पॉलिसी

हैल्थ इंश्योरेंस, मुसीबत के समय में आपको और आपके आश्रितों को आíथक सहायता प्रदान करती है, लेकिन कभी-कभी हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने में की गई जल्दबाजी आपके लिए मुसीबत भी बन सकती है। ऐसे में हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ी कुछ बातों को ध्यान रखना जरूरी है।

गौर से पढ़ें : अकसर लोग हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के बाद उन्हें फाइलों में रख देते हैं। इसलिए आप पॉलिसी को गंभीरता से पढ़ें। इसमें कौन-कौन सी सुविधाएं हैं, पता करें। इससे अंतिम मिनट में किसी भी तरह की असुविधा से बच सकते हैं। साथ ही आपको ये जानकारी रहेगी कि आपको पॉलिसी के मार्फत कितना कवर मिल सकता है। 

टीपीए को जानकारी दें : ये सुनिश्चित कर लें कि जिस अस्पताल में आप इलाज कराने ज रहे हो, वह टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) के नेटवर्क में आता हो। अस्पताल में भर्ती होने से पहले टीपीए को इत्तला करना जरूरी है। अस्पताल से आप कह सकते हैं कि अगर संभव हो, तो पहले मेडिकल बिलों को टीपीए के पास संस्तुति के लिए भेज जाए। इससे टीपीए को आपके क्लेम का सही तरीके से आकलन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।

इससे ये पता चल जाएगा कि आपको कितना इंश्योरेंस कवर मिल सकता है। अगर आपका क्लेम स्वीकृत नहीं होता तो आप टीपीए से इसका लिखित कारण जरूर मांगे। वहीं आप अस्वीकृत होने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी से भी संपर्क कर सकते हैं, अगर वह क्लेम देने से इंकार करती है, तो आप ओम्बडसमैन का दरवाज खटखटा सकते हैं। अगर वहां भी न्याय न मिलें, तो आप उपभोक्ता फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कॉपी रखें : रीइंबर्समेंट के लिए जरूरी है कि अपने बिलों की मूल कॉपी अपने पास रखें।

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