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बिजली पानी के लिए ठोस नीति चाहिए

आज देश में बिजली और पानी एक बड़ी समस्या है। इसके लिए किसी एक एजेंसी को दोषी ठहराना उचित नहीं। आज जब बिजली व पानी की किल्लत हुई है, तब हमें होश आया है। प्राय: यह देखा गया है कि जब जो चीज हमारे पास होती है, तो हमें उसकी कीमत का पता नहीं चलता। जब वह नहीं रहती तब हम कसमसाते हैं। आज पानी और बिजली के साथ ऐसा ही है। आज खाद और कैमिकल के बल पर एक सीजन में तीन-तीन फसलें ली जा रही हैं। आए दिन होने वाले निर्माण ने जंगल और हरियाली को खत्म कर दिया है। सरकारी कार्यालयों में कोई भी कर्मचारी या अधिकारी पंखा, कूलर या एयर कंडीशनर को स्वयं बंद नहीं करता है। सुबह और शाम को चपरासी एक बार ही मेन स्विच को बंद करता है। सरकारी कार्यालय में पानी और बिजली की घोर बर्बादी हो रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार ने अभी तक पानी व बिजली के बारे में कोई ठोस नीति नहीं बनाई है।

यतेंद्रसिंह चौधरी, नानकपुरा, नई दिल्ली

क्या यह उचित है?

आज के अखबार में ‘शराबबंदी का नशा’ पढ़ा। आदर्श से ज्यादा जनता की जन की चिंता करनी चाहिए। गुजरात सरकार ने आदमी को दारू न पीने को मनाही की है। फिर भी लोग पीते हैं। पीकर घर में कलह करते हैं। औरतों को पीटते हैं। बच्चों को खाना नहीं मिलता और पुरुष दारू पीने पर पैसा गंवाते हैं। क्या ये उचित है?

विद्याधर आर्य, शेख सराय, नई दिल्ली

टीवी में बच्चों का शोषण

अभी हाल ही में, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि दुकानों पर कम आयु के लड़के रखने पर दुकानदारों को बीस हजार का जुर्माना तथा छह मास का कारावास होगा। अच्छी बात है। ये बच्चे अपने माता-पिता की कठिनाई में हाथ बंटाते हैं। इसके विपरीत टीवी सीरियल में काम करने वाले बाल कलाकार प्राय: धनी घरानों से होते हैं। समय (खाली) उसके पास तो होता ही नहीं है। स्कूल से प्राय: 3 बजे आ कर होमवर्क भी करना होता है, मंथली टेस्ट की तैयारी करनी होती है और फिर सीरियल के नए एपिसोड के लिए भागो। खेलने तथा आराम करने का समय ही कहां है। सरकार को आदेश निकाल कर 18 वर्ष की आयु से कम के बच्चों का टीवी तथा पिक्चरों में काम पर भी पाबंदी लगानी चाहिए।

ब्रज मोहन, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

पानी के लिए खून बहेगा

आज दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पानी की भयावह स्थिति है। चार माह से पानी को लेकर खून-खराबे हो रहे हैं। समुद्र में यह अमृत जल क्यों मिले। इससे मछली पालन, कृषि, बिजली उद्योग लाभ लेंगे। मुख्य रूप से पेय जल से निजात मिलेगी। आशंका के पूर्व चारों ओर जल उद्वहन का जल बिछाए। बंजर पहाड़ों पर हरियाली का ध्येय भी साधा जाए। आदिवासी वनवासियों का पलायन रुकेगा। इस आसान मगर विकट लक्ष्य को कौन पूर्ण करेगा?

गफूर खान, उज्जैन, मध्य प्रदेश

मियां-बीवी
खुशी के
छोटे-छोटे
स्टेशनों पे रुकती
गाड़ी है।
बीवी कुदाल
मियां
तगाड़ी है।

शरद जयसवाल, कटनी, म. प्र.

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