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केंद्र सरकार के आदेश के विरोध में डूटा की हड़ताल

दिल्ली विश्व विद्यालय के अध्यापकों के संगठन (डूटा) ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी को दो साल तक रिक्त पदों पर स्थाई भर्ती नहीं करने संबंधी आदेश देने का विरोध करते हुए 23 जुलाई को हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।


 डूटा के सचिव दिनेश अदल्खा ने कहा कि सरकार का यह दो साल तक नई नियुक्ति से बचने का बहाना है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सरकार की इस कोशिश को गैर अकादमिक और पूर्णत अवैज्ञानिक बताया है। उन्होंने कहा कि डूटा सरकार के इस फैसले के विरोध में अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के आह्वान पर 23 जुलाई को आयोजित हड़ताल में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी भी गैर जिम्मेदाराना निर्णय का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके वेतनमान के साथ भी छेड़छाड़ की है।


डूटा महासचिव ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा नेट को विश्वविद्यालयों में अध्यापन के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लिए पीएचडी तथा एम फिल की योग्यता रहनी चाहिए और जो लोग नेट कर रहे हैं उन्हें पीएच डी तथा एम फिल से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

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