अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह नहीं

राज्य सरकार ने कहा कि अस्पतालों में जेनरिक दवाओं के हर बैच की जांच करायी जाती है और इसकी गुणवत्ता पर किसी तरह का संदेह नहीं किया जा सकता। जेनरिक दवाओं से बीमारी ठीक नहीं हो रही है और इसके प्रयोग से दूसरी तरह की बीमारियां हो रही हैं यह भ्रम ब्रांडेड दवा का व्यापार करने वालों द्वारा जानबूझ कर फैलाया जा रहा है। क्योंकि जेनरिक दवाओं के इस्तेमाल से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने मंगलवार को विधान परिषद में केदारनाथ पाण्डेय के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य के मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जेनरिक दवाएं ही लिखने का निर्देश जारी किया है। इसके प्रयोग से मरीज ठीक हो रहे हैं।

पीएमसीएच में हर दिन करीब डेढ़ हजार लोगों का इलाज होता है और वे इन्हीं दवाओं से ठीक होकर जा रहे हैं। रोगियों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न अस्पतालों में जेनरिक दवाओं की 48 दुकानें भी खोली गयी हैं। वर्ष 2006-07 और वर्ष 2007-08 में 1 अरब 18 करोड़ 81 लाख 93 हजार रुपए की दवा खरीद के लिए सरकार ने पैसा उपलब्ध कराया है। मंत्री ने कहा कि जेनरिक दवा से संबंधित कोई शिकायत मिलने पर उसकी जांच करायी जाएगी और कार्रवाई भी होगी।

वहीं सतीश कुमार के तारांकित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि फीफॉल जेड कैप्सूल में लोहे के बुरादा के प्रयोग की जांच करायी जा रही है। दवा के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। इसके पहले सतीश कुमार ने सदन में कैप्सूल और चुम्बक भी पेश किया। उन्होंने कहा कि कैप्सूल के भीतर जो बुरादा है वह चुम्बक में सट जाता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह नहीं