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विनिवेश की शुरूआत सूचीबद्ध कंपनियों से: वित्त मंत्रालय

विनिवेश की शुरूआत सूचीबद्ध कंपनियों से: वित्त मंत्रालय

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम की नयी शुरूआत उन सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की बिक्री से की जा सकती है जिनमें अभी जनता की हिस्सेदारी का स्तर कम है। वित्त सचिव अशोक चावला ने कहा कि हम शुरूआत उन कंपनियों से करेंगे जो पहले से सूचीबद्ध हैं और जिनके शेयर अभी दो प्रतिशत या पांच प्रतिशत तक ही बाजार में हैं। ऐसी कंपनियों के बाजार में चढ़ाए गए शेयरों का अनुपात बढ़ाने की गुंजाइश बनी हुई है।
   

इस समय कम से कम 12 ऐसी कंपनियां है जो बाजार में सूचीबद्ध तो हैं पर जनता के बीच जारी उनके शेयरों का अनुपात 10 प्रतिशत से कम है। ऐसी कंपनियों में एनएमडीसी, एमएमटीसी, नेवेली लिगनाइट और हिंदुस्तान कॉपर जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने ऐसी किसी कंपनी का नाम नहीं लिया जहां से विनिवेश की शुरूआत की जा सकती हैं।
  

वित्त सचिव ने बहरहाल इस बात से इनकार किया कि विनिवेश के पैसे का इस्तेमाल सरकार अपना राजकोषीय घाटा कम करने में करेगी। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 6.8 प्रतिशत के बराबर रहने का अनुमान है। पिछले 18 वर्ष में यह सबसे उंचा राजकोषीय घाटा होगा।
   

उन्होंने कहा कि विनिवेश की जाने वाली कंपनियों के बारे में वित्त मंत्रालय की कुछ प्राथमिक राय जरूर है और उसने कुछ कंपनियों की पहचान भी की है। इस बारे में संबंधित मंत्रालयों के साथ कुछ चर्चा भी हुई है। यह पूछे जाने पर कि सरकार ने विनिवेश से कितनी आय का लक्ष्य रखा है तो अशोक चावला कहा कि इस बारे में अभी कोई आंकड़ा तय नहीं किया गया है, अभी प्राथमिक चर्चा ही हुई है।
   

उन्होंने कहा, अंतत: क्या तय होता है, मंत्रिमंडल क्या मंजूर करता है, प्रतिशत क्या होगा, कब बिक्री की जाएगी, उस समय क्या बाजार कीमत मिलेगी, इन सब बातों से तय होगा कि विनिवेश से क्या प्राप्ति होगी। क्योंकि अंतत: यह राशि बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या और उनकी बाजर कीमत पर निर्भर करेगी। 
  

चावला ने संकेत दिया कि आर्थिक समीक्षा 2008-09 में विनिवेश से 25,000 करोड़ रुपए जुटाने की संभावना फिलहाल चालू वित्त वर्ष में पूरी नहीं होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विनिवेश के पैसे का इस्तेमाल घाटे को पूरा करने की बजाय सामाजिक विकास के प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।
   

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार राष्ट्रीय निवेश कोष के नियमों में बदलाव कर सकती है तो उन्होंने कहा, मैं नहीं कह सकता। इस पर निर्णय मंत्रिमंडल को करना है। लेकिन यह निवेश कोष के जरिए हो या दूसरी तरह से, पैसा सामाजिक क्षेत्र  के विशेष कार्यक्रमों पर ही खर्च किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि संप्रग के नेतत्व वाली पिछली सरकार ने विनिवेश से मिले धन के उपयोग के लिए राष्ट्रीय निवेश कोष का गठन किया था। इस कोष का पैसा प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है और उससे प्राप्त आय का एक हिस्सा खस्ताहाल उपक्रमों को मजबूत बनाने और कुछ हिस्सा सामाजिक विकास की योजनाओं पर खर्च किया जाता है।

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  • Web Title:विनिवेश की शुरूआत सूचीबद्ध कंपनियों से: वित्त मंत्रालय