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झारखंड में दल-बदल का रिकार्ड

अजीब शै है चुनाव। कहीं दोस्त बन जाते हैं दुश्मन तो कहीं दुश्मन गले लग जाते हैं। मकसद एक। बस कुर्सी मिल जाए। रातोंरात आस्थाओं के डिगने का यह खेल इस बार के लोकसभा चुनाव में झारखंड में भी खूब देखने को मिल रहा। दलबदलुओं की बन आयी है। रिकार्ड कायम हो रहा। हर दल में भगदड़ मची है। टिकट नहीं मिला तो बगावत का झंडा उठा लिया। तुम नहीं कोई और सही। कमीज बदलने के लिए कई बार सोचना पड़ता है, लेकिन चुनाव में नेताओं को दल बदलने में कोई वक्त नहीं लग रहा है। एक अदद टिकट का सवाल जो ठहरा।ड्ढr नागमणि का जवाब नहीं:‘आया राम गया राम’ की कहानी चतरा से शुरू करं। बिहार की नीतीश सरकार में कृषि मंत्री रहे स्वनामधन्य नागमणि सबकी जुबान पर हैं। पूर्व में यहां से सांसद रह चुके नागमणि को बिहार में जदयू ने उजियारपुर से टिकट नहीं दिया। बस क्या था। छोड़ दिया दल। चले आये झारखंड। लालू का प्रसाद (राजद टिकट) लिया और अब जल्द ही मैदान में होंगे। उधर, राजद सांसद धीरंद्र अग्रवाल को इस बार लालू का प्रसाद नहीं मिला। दूसरे ठौर की तलाश में वह जुटे थे। अंतत: चतरा से इस बार निर्दलीय ही अपनी किस्मत आजमायेंगे। यहां के भाजपा नेता अरुण यादव ने भी दल छोड़ा और शरद यादव की कृपा से जदयू का टिकट झटक लिया।ड्ढr पाला बदलने में माहिर: इसी तरह नित्यानंद मेहता आजसू छोड़कर रामविलास पासवान की शरण में चले गये। पासवान ने उन्हें फौरन हाारीबाग से लोजपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। जमशेदपुर के नेता शैलेंद्र महतो झामुमो में थे। वहं से भाजपा में आये। फिर अलग हो अपनी पार्टी बनायी। कुछ दिन सालखन मुरमू के साथ घूमे। अंतत: चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद सुदेश महतो का दामन थाम लिया। आजसू के टिकट पर जमशेदपुर से किस्मत आजमायेंगे। कोडरमा से प्रणव वर्मा पिछले उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार थे। जमानत भी नहीं बचा पाये। इस बार भाजपा ने उनको टिकट नहीं दिया तो लालू के दरबार में पहुंच गये। राजद का टिकट लेकर मैदान में हैं। पलामू में पूर्व नक्सली कामेश्वर बैठा इस बार झामुमो के टिकट पर लड़ेंगे। पिछली बार बसपा से लड़े। गिरिडीह से भाकपा ने अकलू राम महतो को अपना उम्मीदवार बनाया है। वह राजद के नेता रहे हैं।ड्ढr विधायकी भी दावं पर: संथालपरगना में भी राजहमल सीट से कांग्रेस विधायक थॉमस हांसदा राजद के टिकट के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। लेकिन उससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट करना चाहते हैं। यूजीडीपी के नेता रहे नज्म अंसारी ने ताजा-तरीन कांग्रेस का दामन थामा है। वह भी कोडरमा से प्रत्याशी बनाये जा सकते हैं। इधर, झामुमो के विधायक सुखराम उरांव भी चाईबासा से पार्टी टिकट की आस में हैं, टिकट न मिला तो उन्होंने निर्दलीय मैदान में कूदने का एलान किया है।

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