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पंजाब के अर्जुन पुरस्कार विजेता, ट्यूशन पढा़कर चला रहे जिंदगी

राष्ट्रपति भवन और केंद्रीय सामाजिक कल्याण मंत्रालय की अनुशंसा के बावजूद पंजाब सरकार ने अर्जुन पुरस्कार विजेता पावरलिफ्टर राजिंदर सिंह सोढी को सरकारी नौकरी नहीं दी है।

तत्कालीन राष्ट्रपति डा एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें सरकारी नौकरी दिए जाने की अनुशंसा पंजाब सरकार से की थी लेकिन सरकार ने डा कलाम की अनुशंसा की अवहेलना करते हुए इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।

इस मामले में राज्य सरकार की अनदेखी के बावजूद राजिंदर ने मीडिया या न्यायालय की शरण नहीं ली है।

राजिंदर सिंह सोढी जो कि विकलांग हैं और पाराओलंपिक सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। वह इस समय अपने पडोस के बच्चों को ट्यूशन पढा़कर अपनी जिंदगी काट रहे हैं। राजिंदर पंजाब के मेहसामपुर गांव के रहने वाले हैं और इस समय सरकारी नौकरी के अभाव में पेट पालने के लिए बच्चों को पढाते हैं। 36 वर्षीय राजिंदर ने सिस्टम मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया है तथा वह 2002 में नई दिल्ली में हुए एशियन बेंच चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक, एथेंस पाराओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अब तक कुल नौ स्वर्ण पदक जीते हैं जिसमें विकलांग होते हुए भी पांच बार सामान्य वर्ग में और चार बार विकलांग वर्ग में जीत हासिल की है।

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  • Web Title: अर्जुन पुरस्कार विजेता, ट्यूशन पढा़कर चला रहे जिंदगी