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ये पत्तियां रंग बिरंगी

ये पत्तियां रंग बिरंगी

वर्षा आते ही हरा रंग अपने विभिन्न शेड्स की आभा तो बिखेरता ही है, साथ ही प्रकृति भी अपनी तूलिका से इन पत्तों पर गजब की चित्रकारी करती है। मरांटा, क्रोटन, क्लेडियम, क्लोरोफायटम, ड्रसीना, एफलिएन्ड्रा आदि के पत्ते किसी का मन मोह लेंगे। वर्षा में सदाबहार पत्तों में यूं भी चमक बढ़ जाती है। इसकी वजह यह है कि वर्षा में पत्ते अच्छी तरह धुल तो जाते ही हैं, साथ ही हवा की नमी भी उनके लिए जीवनदायिनी होती है।

वर्षा आने से पूर्व इन पौधों की खाद- मिट्टी बदल देने से पौधों को पोषक तत्त्व मिल जाते हैं। जो पौधे क्यारी में लगे रहते हैं, जैसे क्रोटन, ड्रसीना, अकेलीफा, एफलिएन्ड्रा, क्लोरोफायटम आदि, ये काफी दढ़ प्रकृति वाले होते हैं। इन्हें केवल शीत तु में बर्फीली हवाओं व पाले से बचाना पड़ता है। सत्य तो यह है कि सूर्य की किरणें ही इन्हें रंग प्रदान करती हैं। इसलिए इन पौधों के लिए सुबह की कम-से-कम दो तीन घंटे की धूप बहुत आवश्यक होती है। क्रोटन, अकेलीफा, एफलिएन्ड्रा तो पूरे दिन की तेज धूप सह लेते हैं, पर इसके लिए जमीन में नमी होनी चाहिए।
इन दिनों स्ट्रेसकेशिया, गाईन्यूरा, जेबरीना, राइयो, ट्रेडेसकेशिया लाल व जामुनी आभा वाले अत्यंत सुंदर पौधे हैं। सेंटक्रीसिया, जेबरीना व ट्रेडेसकेशिया आरोही स्वभाव वाले पौधे हैं। पेड़ के नीचे के छायादार स्थान भरने और पहाड़ी उद्यान में पत्थरों के बीच लगाने के लिए ये अत्यन्त सुन्दर पौधे हैं। गाईन्यूरा अपने मखमली जामुनी पत्तों के कारण लोकप्रिय है। वास्तव में इसके पत्ते तो हरे ही होते हैं, परन्तु उनकी ऊपरी सतह पर जामुनी रंग के मखमली रोएं होते हैं, जो इसे यह आभा प्रदान करते हैं। इसके पत्तों पर धूल-कण बहुत जल्दी जम जाते हैं। उन्हें मुलायम ब्रश से साफ कर दें। अकेलीफा चौलाई परिवार का पौधा है। इसमें हरे, लाल, तांबई व चितकबरे बड़े-बड़े पत्ते होते हैं। पौधे कई बार अच्छी खासी बड़ी झाड़ी का रूप ले लेते हैं। आप चाहें तो पास-पास लगा कर इससे बाड़ भी बना सकते हैं।

सदाबहार रंग-बिरंगे पौधों के लिए पत्तियों की खाद सवरेत्तम रहती है। यदि ये पौधे क्यारी में लगे हों तो गर्मी के दिनों में क्यारी में लॉन की कटी हुई घास या फिर पत्तों की तह अवश्य बिछा दें, ताकि जमीन में ठंडक बनी रहे। बाद में यही पत्ते गल कर खाद का काम करते हैं। तब आप इन्हें खुरपी से गुडमई करते समय मिट्टी में मिला दें। गमलों में ये पौधे कभी एकदम छायादार स्थान में न रखें। पत्तों के रंग के लिए सुबह की सूर्य किरणें कम-से-कम दो घंटे अवश्य मिलनी चाहिए। मरान्टा जैसे कंदीय पौधों के लिए वर्ष में एक बार हड्डी का चूरा अवश्य दें। कंद का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक होता है।

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