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गरीब बच्चों को 25 प्रतिशत आरक्षण न देने पर निजी स्कूलों पर कार्रवाई

मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून बन जाने के बाद अगर प्राइवेट स्कूल गरीब  बच्चों को दाखिले में 25 प्रतिशत आरक्षण नहीं देंगे तो सरकार उस स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी और उसकी मान्यता भी रद्द कर सकती है।

यह जानकारी केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने  राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जनेश्वर मिश्र के एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि देश में 2006-07 में एक लाख 24 हजार 313 प्राइवेट स्कूल थे और उनमें गरीब छात्रों के दाखिले का नियम राज्य सरकार द्वारा संचालित होते थे पर मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक के कानून बन जाने के बाद अगर कोई प्राइवेट स्कूल 25 प्रतिशत गरीब एवं कमजोर वर्ग के छात्र को दाखिला नहीं देता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है।

यह कहे जाने पर कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह फैसला दिया है कि अगर प्राइवेट स्कूल 15 प्रतिशत सीटें गरीब एवं अशक्त बच्चों के लिए आरक्षित नहीं करते तो उनकी जमीन का पट्टा रद्द हो जाएगा। सिब्बल ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला राजधानी के लिए है, जबकि यह कानून अलग है।

कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने जब यह पूछा कि प्राइवेट स्कूल गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला देते हैं तो उसकी भरपाई दूसरे बच्चों की फीस बढाकर लेते हैं। ऐसे में सरकार मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत क्या करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि प्राइवेट स्कूल जब 25 प्रतिशत सीटें गरीब एवं अशक्त बच्चों को देंगे तो सरकार उसका खर्च खुद वहन करेगी और स्कूलों को उसका भुगतान करेगी। सरकार हरेक बच्चे पर शिक्षा पर जितना खर्च करती है,उसके हिसाब से स्कूलों को यह भुगतान किया जाएगा।

गौरतलब है कि छह वर्ष से 14 वर्ष की आयु के छात्रों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक कल राज्यसभा ने पारित कर दिया।

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