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अब होगा घी का घी और तेल का तेल

बाजर में बिकने वाले घी में तेल मिलाकर होने वाले खेल की जांच अब कंप्यूटर के क्लिक पर की जा सकेगी। तीन वर्षों की मेहनत के बाद विशेषज्ञों ने ऐसा माइक्रो प्रोसेसर बनाया है, जिससे मिलावट के खेल से पर्दा उठ सकेगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 50 लाख रुपये खर्च हुआ है। इसके माध्यम से अब घी का घी और तेल का तेल होगा।

गंगानगर स्थित आईआईएमटी ने सीएसआईआर यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के प्रोजेक्ट में यह सफलता हासिल की है। अलीगढ़ मुस्लिम विवि में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के एचओडी प्रो. महफूजुर्रहमान तथा आईआईएमटी से ईईई के एचओडी हुसैन फिरोज अंसारी ने ‘माइक्रो प्रोसेसर बेस्ड सिस्टम टू डिटरमाइन डिफ्रेंट प्रॉपर्टीज ऑफ ऑयल इन ए ब्लेंडिड ऑयल’ थीम पर संयुक्त रूप से रिसर्च की। फिरोज अंसारी के मुताबिक यह तकनीक तेल की प्रॉपर्टी ‘विस्कोसिटी’ पर आधारित है।

तेल की जितनी ज्यादा विस्कोसिटी होगी, वह उतना ही गाढ़ा होगा और फ्लो नहीं करेगा। प्रोसेसर में एक कंटेनर होगा जिसमें विस्कोसिटी बढ़ाने को मिश्रण को शून्य डिग्री सेल्सियस तक थर्मोकूलर के माध्यम से ठंडा किया जाएगा। फिरोज के अनुसार कंटेनर में डीसी मोटर लगाया गया है और जैसे-जैसे विस्कोसिटी बढ़ेगी, वैसे ही मोटर में लगी विंग घूमने की स्पीड कम होती जाएगी और मोटर ज्यादा करंट लेगा।

करंट की स्थिति कन्वर्टर्स द्वारा डिजिटल सिग्नल में बदली जाएगी। कंप्यूटर में पहले से ही विभिन्न तेल की विस्कोसिटी निश्चित मानक पर फीड रहेगी। ऐसे में यदि घी में कोई तेल मिला है तो कंप्यूटर स्क्रीन पर विस्कोसिटी व तापमान का संबंध ग्राफ के रूप में बनकर सामने आ जाएगा।

घी में जो तेल सर्वाधिक होगा, ग्राफ उसकी तरफ खिसक जाएगा। फिरोज के मुताबिक कंप्यूटर में पहले से ही डाटा फीड रहता है, ऐसे में कंटेनर में मिश्रण डालते ही मिलाए गए तेल के अनुसार कंप्यूटर स्क्रीन पर ग्राफ बनने लगते हैं। फिरोज के अनुसार पूरा प्रोजेक्ट सीएसआईआर को भेज दिया गया है।

 

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