अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सट्टेबाजी और जमाखोरी निशाने पर

सट्टेबाजी और जमाखोरी निशाने पर

दाल, चीनी और खाने पीने की दूसरी जरुरी वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों से चिंतित केन्द्र सरकार ने राज्यों को सट्टेबाजी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए कहा है।

वित्त सचिव अशोक चावला ने बताया कि दाल, दलहन, चीनी और खाद्य तेलों के मामले में राज्यों से स्टॉक नियंत्रण आदेश लागू करनेऔर जमाखोरी के खिलाफ कारवाई करने के लिए कहा जा रहा है। चावला ने माना कि दाल, चीनी तथा कुछ दूसरी आवश्यक उपभोग की वस्तुओं के दाम हाल में काफी बढ़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार इनकी आपूर्ति बढ़ने के लिए एक तरफ आयात कर रही है जबकि दूसरी तरफ घरेलू कारोबारियों कीसटोरिया प्रवृति को दबाने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दालों की सीमित पैदावार और मानसून कीबेरुखी से इन दिनों अरहर और उड़द दाल 80 से 90 रुपए किलो तक बिक रही हैं। चीनी जो कि कुछ महीने पहले 18 से 20 रुपए पर थी 30 रुपए किलो से ऊपर निकल गई। खुली बोरी का आटा 15 रुपए से कम नहीं बिक रहा। 

चावला ने माना कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने का मिशन चलाए जाने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से दाल दलहन की पैदावार ज्यादा नहीं बढ़ पाई है। आयात के विकल्प भी काफी सीमित हैं। सरकार दालों का आयात बढ़ने का भी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ दालों और तिलहनों का उत्पादन एक स्तर पर बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ दाल. चीनी और खाद्य तेलों की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है।

बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ी है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से भी खाद्यान्न, तिलहन और दलहन के दाम बढ़े हैं। चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के लिए उन्होंने हर दो वर्ष के अंतराल में पैदा होने वाली चक्रीय स्थिति से जोड़ा। उन्होंने कहा कि चीनी के दाम ही गन्ना उत्पादन की घट-बढ़ तय करते हैं।

मानसून की बेरुखी को देखते हुए सरकार की तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर वित्त सचिव ने कहा इसके बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगी।       

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सट्टेबाजी और जमाखोरी निशाने पर