DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गुजरात की राखियां मन मोह रही हैं

गुजरात के अहमदाबाद और सूरत शहरों से दिल्ली पहुंची  छोटी-छोटी राखियां बड़ों-बड़ों का मन मोह रही हैं। दिल्ली के थोक बाजार में पहुंची इन राखियों की धूम है। इन राखियों के साथ वाले धागे भी हैं,जो बुजुर्गो और सादगी पसंद नौजवानों की पसंद माने जाते हैं। थोक बाजार से राखियां राजधानी के पड़ोसी राज्यों के फुटकर दुकानदार ले जा रहे हैं।


दिल्ली का सदर बाजार राखियों का थोक बाजार भी है। करीब चार सौ करोड़ के सालाना कारोबार वाले राखी बाजार में गुजरात की  वाली राखियों के पहुंचने से फुटकर दुकानदारों की पहली पसंद अब यही राखियां हैं। गुजरात वाली  राखी के नाम से बिकने वाली इन राखियों की बनावट आकर्षक कलाबत्तू के काम की वजह से ग्राहकों को सहज अपनी ओर आकर्षित करती है। राखियों के कारोबारी मदन लाल का कहना है- गुजरात से हर साल माल आता है। थोड़ा महंगा होने की वजह से इसकी खपत पंजाब, हरियाणा के अलावा दिल्ली के पॉश इलाकों में होती है। इस साल छोटी राखियां आयीं हैं। ये सस्ती भी हैं और लुभावनी भी।

 चमकवाली राखियों के बीच सफेद माती के काम वाली पियर्ल राखी, गोटे के फूल और रेशमी फुंदने से तैयार किड् राखी, परदो के काम की फूल वाली गुजराती राखी सदर बाजार के दुकानदार बाहर से आये खुदरा दुकानदारों के सामने पेश कर रहे हें। इन्हीं राखियों के बीच सूरत से आयी चांदी के काम वाली राखियां भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। थोक बाजार में वाली राखियां 120 से 600 रुपये तक हैं।


बीते दो दशक से राखी के थोक कारोबार से जुड़े अनिल कुमार ने बताया- राखी का काम सीजनल जरूर है लेकिन थोक व फुटकर दुकानदारों के  लिए तीन महीने तक रोजगार का जरिया बनता है। दिल्ली में बनी राखियों की खेप भी पड़ोसी सूबों को जती है। दिल्ली में गुजरात ही नहीं मुंबई,अंबाला, जयपुर और इन्दौर तक से राखियां दिल्ली के थोक बाजार में पहुंचती हैं। दिल्ली के मुस्तफाबाद, सोनिया विहार, सीलमपुर, शाहदरा तथा यमुनापार की कई कालोनियों में होली बीतते ही राखी बनाने का काम शुरु हो जता है। दिल्ली में राखी बनाने में माहिर कारीगरों में मुस्लिम महिलाओं की तादाद भी उल्लेखनीय हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गुजरात की राखियां मन मोह रही हैं