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ग्राफिक डिजाइनिंग करें कुछ नया

आजकल जो क्षेत्र तमाम बाधाओं के बावजूद लगातार बढ़ रहे हैं उनमें से एक क्षेत्र ग्राफिक डिजाइनिंग का भी है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें सभी चीजों का डिजाइन तैयार किया जाता है। डिजाइन ही किसी चीज की सफलता का पैमाना माना जाता है। यदि डिजाइन अच्छी नहीं है तो समझ लीजिए कि बाजार में वह चीज अपने प्रतिस्पर्धी उत्पादों के सामने कहीं नहीं टिक पाती। डब्ल्यूएलसी कॉलेज की नेशनल डिजाइन हेड दीप्ति बावेजा के अनुसार, ‘आज लगभग 85000 से भी अधिक लोग इस प्रोफेशन से जुड़े हैं।

ऐसी संभावना है कि 2014 तक ग्राफिक डिजाइनिंग भारत का सबसे ज्यादा विकसित क्षेत्र बन जाएगा तथा विजुअल कम्युनिकेशन, एडवर्टाइजिंग, प्रकाशन, मीडिया प्रोडक्शन हाउस, कंप्यूटर डिजाइन के क्षेत्र में डिजाइनरों की मांग बढ़ेगी।  लुभावने पोस्टर्स, बैनर्स, ब्रोशर्स, प्रोडक्ट बैंकिंग, इलेस्ट्रेशन, फिल्म एवं टीवी प्रोग्राम के टाइटिल को देखकर हर किसी का आकर्षित होना स्वाभाविक है। लेकिन इसे लोगों तक पहुंचाने में सबसे ज्यादा मेहनत ग्राफिक डिजाइनरों की टीम को ही करनी होती है।

इसे तैयार करने के लिए डिजाइनरों की एक टीम होती है और उसे इसमें बेहतर नतीजे हासिल करने के लिए रचनात्मक सोच के साथ जी-तोड़ मेहनत भी करनी पड़ती है, क्योंकि इसमें सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता है।’

एक दौर ऐसा था, जब सारा पैकेज विदेश से आउटसोर्स किया जाता था, परन्तु धीरे-धीरे भारत में भी इसके प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है। अब अधिकांश डिजाइन यहीं पर पूरे किए जाते हैं। दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं की पैकिंग से लेकर समाचार पत्र-पत्रिकाओं, टीवी चैनल्स, फिल्म इंडस्ट्री एवं वेबसाइट्स पर ग्राफिक डिजाइनरों की भारी मांग है।

शैक्षिक योग्यता एवं अभिरुचि
जिस तेजी से ग्राफिक डिजाइन में रोजगार के अवसर सामने आए हैं, उसी गति से कई तरह के पाठ्यक्रम भी सामने आए हैं। फाउंडेशन कोर्स से लेकर चार साल तक के डिग्री कोर्स बाजार में मौजूद हैं। योग्यता के रूप में छात्रों को 10+2 उत्तीर्ण अनिवार्य है, तभी आगे चलकर संभावनाएं सामने आती हैं। स्नातक एवं परास्नातक के उपरांत कई डिप्लोमा एवं पीजी डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं, जिनकी अवधि एक वर्ष से लेकर 2 वर्ष तक है, जबकि 12वीं के पश्चात 12 माह से लेकर 36 माह तक के पाठ्यक्रम इस क्षेत्र में हैं।

भीड़ में अपनी पहचान बनाने के लिए छात्रों को अपनी सोच को सकारात्मक बनाना होता है। तभी कुछ अलग थीम सामने आ पाती है। आज दिन प्रतिदिन नए डिजाइनों का आगमन हो रहा है, जो इन्हीं ग्राफिक डिजाइनरों की देन है। क्लाइंट का रुख भी समय के साथ बदलता रहता है। उनकी डिमांड को ध्यान में रखते हुए डिजाइन करना बेहतर रहता है। ग्राफिक डिजाइनर का काम कंप्यूटर पर आधारित है, जबकि वास्तविकता यही है कि असली काम हाथ से स्क्रैच और काटरून बनाकर होता है।

पाठ्यक्रम
पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को प्रमुख डिजाइनों के बारे में अवगत कराने से लेकर कंप्यूटर द्वारा उनके प्रयोग संबंधी जानकारी प्रदान की जाती है। इसके अंतर्गत कई तरह के सॉफ्टवेयरों जैसे इन डिजाइन, कोरल ड्रॉ, फोटोशॉप, पेजमेकर, क्वार्क एक्सप्रेस, 2-डी एवं 3-डी एनीमेशन, 3-डी स्टूडियो मैक्स की जानकारी दी जाती है। विज्ञापन एजेंसियों में एड का ले आउट बनाने, पोस्टर्स, बैनर्स डिजाइन करने, काटरून तैयार करने, फिल्मों में प्रोडक्शन संबंधी मदद तथा वेबसाइट पर वेब पेज की डिजाइनिंग आदि का सभी ज्ञान प्रशिक्षण के दौरान दी जाती है।

मिलने वाली सेलरी
ग्राफिक डिजाइनिंग एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है जिसमें पैसे की कमी नहीं है। यदि आपकी क्रिएटिविटी जबरदस्त है तो आप लाखों में खेल सकते हैं। जॉब से लेकर फ्रीलांसिंग तक में पैसे का बोलबाला है। शुरूआती दौर में ट्रेनी ग्राफिक डिजाइनर को 5-7 हजार रुपए, जूनियर ग्राफिक डिजाइनर को 12-15 हजार, सीनियर या एक दो साल का अनुभव हो जाने पर 18-20 हजार, आर्ट डायरेक्टर को 35-40 हजार तथा डिजाइनर हेड को 50-60 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं, जबकि फ्रीलांसिंग करने वाले प्रति मिनट के हिसाब से भुगतान हासिल करते हैं।   
 

रोजगार के अवसर
दीप्ति के अनुसार, ‘सच पूछा जाए तो ग्राफिक डिजाइनिंग का कार्यक्षेत्र काफी फैला हुआ है। इसके बिना किसी अच्छे डिजाइन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। समाचार पत्र-पत्रिकाओं से लेकर न्यूज चैनल्स, पैकेजिंग, फिल्म एवं विज्ञापन तक इन्हीं डिजाइनरों की धमक है। इंटरनेट पर नित्य नए प्रयोग किए जा रहे हैं, हर चीज का प्रेजेंटेशन आकर्षक होता जा रहा है। इलेस्ट्रेशन, कैरीकेचर तथा काटरून हर अखबार की पसंद बनते जा रहे हैं। अत: इसका कार्यक्षेत्र असीम है।

सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट हो चुका है कि आने वाले वर्षों में हजारों से लेकर लाखों की संख्या में ग्राफिक डिजाइनरों की आवश्यकता पड़ेगी। रोजगार के स्वरूप को देखें तो ग्राफिक डिजाइनिंग का कोर्स करने के पश्चात जूनियर ग्राफिक डिजाइनर, सीनियर ग्राफिक डिजाइनर, आर्ट डायरेक्टर तथा डिजाइनर हेड जैसे पद मिलते हैं। इसके अंतर्गत पत्र-पत्रिकाओं से लेकर प्रोडक्शन हाउसों, एड एजेंसियों, विविध उत्पादों से जुड़े संस्थानों में या फ्रीलांसिंग का कार्य किया जा सकता है।’


प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
ऐसे कई संस्थान हैं, जो अपने यहां से ग्राफिक डिजाइनिंग से संबंधित कोर्स करवाते हैं-

- एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग, 54, तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया, महरौली,नई दिल्ली-44                         
वेबसाइट - www.apeejay. edu

- एरिना एनीमेशन, अवंतिका कामर्शियल कॉम्प्लेक्स, साकेत, नई दिल्ली-110017
वेबसाइट - www.arena-multimedia.com

(दिल्ली में पटेल नगर, मुनिरका, साउथ एक्स, प्रीत विहार में शाखाएं मौजूद)

-आईआईएलएम स्कूल ऑफ डिजाइन, प्लॉट नं.- 69, सेक्टर- 53, गुड़गांव।                                
  वेबसाइट - www.iilm.in

-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवरटाइजिंग, डब्ल्यू 23, सेक्टर-11, नोएडा-201301                                   
वेबसाइट - www.niaindia.org

-सृष्टि स्कूल ऑफ डिजाइन, बैंगलौर, पो.बा. नं.- 6430, डोड्डाबालपुर रोड, बैंगलोर-560064
वेबसाइट - www.srishti.ac.in

- सिम्बियोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, नियर पीएमसी वाटर टैंक, वीमन नगर, पुणो-411014
वेबसाइट - www.symbiosisdesign.ac.in

- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर
वेबसाइट - www.iitk.ac.in

- डब्ल्यूएलसी कॉलेज ऑफ इंडिया
वेबसाइट - www.wlccollege.org

- इंटनेशनल कॉलेज ऑफ एनिमेशन आर्ट्स एंड टेक्नोलॉजी, ठाकुर माल, ठाकुर गांव, कांडवली (पूर्वी), मुंबई-400100
वेबसाइट - www.icaat.in

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