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अमेरिका में मंदी उभरने से डूब गए थे बैंक

लंदन स्कूल ऑफ इकनोमिक्स के प्रोफेसर एमिरेटस लार्ड मेघनाथ देसाई ने कहा कि मंदी ने आम से लेकर खास आदमी की कमर तोड़ दी है। वर्तमान संकट सन् 1980 या 1997-98 से अलग है। क्योंकि इससे न केवल वित्तीय तंत्र ध्वस्त हुआ है, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी मंदी का संकट गहराया है। लेकिन, इन सबके बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था में वित्तीय संकट असंतुलन वित्तीय संकट का मुख्य कारण है। सोमवार को एमिटी विवि में आयोजित सेमिनार के दौरान उनके लिखित संदेश के जरिए यह बातें बताई गईं।


संदेश में उन्होंने कहा कि अमेरिका में सन् 2007 के मध्य में मंदी शुरू हुई थी। सन् 2008 के शुरुआती दौर में वहां के बैंक डूबने लगे। नवंबर 2008 व अप्रैल 2009 की जी-8 बैठक ने इस संकट को ज्यादा गहरा दिया। सेमिनार में ग्रेट इस्टर्न एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड के सीएमडी योगेंद्र कुमार मोदी ने कहा कि मंदी में न केवल बैंकिंग अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि देश की औद्योगिक हालत भी चिंताजनक है। इस मंदी में ही हमें तरक्की के अवसर निकालने होंगे। उन्होंने कि आने वाले दिनों में देश के घरेलू उत्पादों के विश्व में मांग बढ़ने की संभावना है। जिसके चलते हमें उस दिशा में काम करना होगा। इस मौके पर यूनाइटेड किंगडम के उच्चयुक्त सर चाल्र्स रिचर्ड बरनोन स्टग, यूरोपियन कमिशन की राजदूत डेनियली स्मादज व विवि के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक चौहान सहित अनेक विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।

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