DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गेहूं की लतीफाई

मुद्दतों बाद मेरा थर्ड क्लास दोस्त, यानी कक्षा तीन का बाल सखा, वह लोकल कवि नमूदार हुआ। बोला-‘पंडित, क्या उल्टा जमाना आ गया है? जिसे पीछे के पन्ने की न्यूज होना चाहिए, वह आगे के पेज पर छप रही है। जिधर जाता हूं, एक ही चर्चा पाता हूं।’ मैंने कहा-‘भाई, मैं कुछ समझ नहीं।’ वह मुस्कुराया-‘अभी समझ जाओगे। फिलहाल मेरा एक नितांत मौलिक, अप्रकाशित और अप्रसारित चुटकुला सुनो। इसके प्रथम श्रोता बनो।’
तब अगले ने ताजा जोक उछाला-‘एक किसान था। वह गाड़ी पर अनाज की बोरियां लादकर शहर बेचने जा रहा था। तभी एक वर्दीधारी प्रकट हुआ। उन बोरियों पर डंडा फटकारते हुए बोला, ‘अबे, इनमें है क्या?’ किसान गिड़गिड़ाया, ‘हुजूर, गेहूं।’ अचानक वर्दीधारी पलटता हुआ बोला- तो फिर हाथ मिला। क्योंकि मैं भी गे हूं।’ अतिशय गे-फुल लतीफा था। मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सका। उस लोकल कवि से कहा-‘दोस्त, तेरे को इतनी झन्नाटेदार बातें सूझती कैसे हैं? मैंने हजारों सामिष-निरामिष चुटकुले सुने हैं। लेकिन यह वाला तो वाकई मौलिक है। पर एक बात बोलूं। तुम इसको अपने तथाकथित मंचीय हास्यकवियों या लाफ्टरशो वाले कैरीकेचरियों को सुनाने की गलती न कर बैठना। वे इसे भी ले उड़ेंगे। तुम्हारी सारी मौलिकता पहले के जैसी ही धरी रह जाएगी। इस ‘गेहूं’ वाले का भी वही हश्र हो जाएगा, जो तुम्हारे दाल और सब्जी वाले लतीफों का हुआ था। भाई लोग महफिल, मंच, मीडिया से सुना के नाम-दाम कमाएंगे। तू यूं ही लोकल ब्रांड कवि बना हुआ अपनी चप्पलें चटखारता घूमेगा।


कवि बोला-‘मित्र, ऐसी गलती इस बार कतई नहीं होगी। इस चुटकुले को मैं हास्य कविता में ढाल लूंगा। कॉपीराइट की मुहर ठुंक जाएगी। फिर देखता हूं, कौन माई का लाल इसे ले भागने की जुर्रत करता है?’ मैंने कहा-‘सच कह रहे हो। ये चुटकुले छंदबद्घ होते ही हास्यकवियों की मौलिक रचनाएं बन जाते हैं। चुटकुले तो अनाथ बच्चे हैं। जिसने गोद में खिला लिया, उसी की औलाद हो गए।’ वह संजीदा होता हुआ बोला-‘सही कह रहे हो मेरे भाई। यह दौर ही लैमारों का है। सर्वत्र पाइरेसी है।’ अचानक वह लोकल कवि जिस तेजी से आया था, वह तीन गुनी गति से पीछे मुड़ा और गे-टेंस में यह कहता हुआ नाइन-टू-इलेवन हो लिया-‘फिर आएंगे। मिलेंगे। बातें करेंगे। हंसेंगे। बोलेंगे। पिएंगे। खाएंगे।’     
आश्चर्य है! जबकि आज इंसान का पेट दाल-सब्जी के नित बढ़ते भावों से अंदर घुसा जा रहा है, लोकल कवि समान लोग गेहूं जैसी सस्ती चर्चा की बोरियां अपनी पीठ पर लादे काहे घूम रहे हैं?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गेहूं की लतीफाई