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हमारी संस्कृति उतनी कमजोर नहीं

समलैंगिकता के मुद्दे पर कई बहस छिड़ी। ज्यादातर लोगों का मानना है कि समलैंगिकता को मान्यता देना हमारी संस्कृति को भ्रष्ट करना है। परंतु हमारी संस्कृति इतनी कमजोर नहीं। चाहे स्त्रियों का परदे से निकलना हो या अंतरजतीय विवाह। संस्कृति को हमेशा बीच में लाया गया। परंतु आज हम खुद देख रहे हैं, स्त्रियां पुरुषों से आगे निकल गई हैं एवं अंतरजतीय विवाह भी सबकी मंजूरी से हो रहे हैं। जिससे संस्कृति भ्रष्ट नहीं हुई, बल्कि दो संस्कृतियों का अद्भुत संगम हुआ है। अगर कानून ने मान्यता दी है तो इसके पीछे कोई ठोस वजह रही होगी, जो सबके हित में हो। हर इंसान को जीने का हक है और अगर वो आपको परेशान किए बिना जी रहा है तो उसे जीने दें।

 प्रियंका गोस्वामी, जमिया , नई दिल्ली

सचिन को दोष देना गलत

विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर बचपन से दोस्त रहे हैं। एक समय था जब कांबली को सचिन से ज्यादा प्रतिभाशाली माना जाता था, लेकिन समय बीतने के साथ सचिन जहां लंबी रेस का घोड़ा साबित हुए वहीं कांबली एक धूमकेतु। इन दिनों प्रसारित हो रहे एक रियलिटी शो में कांबली ने अपने असमय खत्म हुए क्रिकेट करियर के लिए सचिन पर दोष मढ़ा है। कांबली का कहना है कि उनका करियर बच सकता था अगर सचिन उनकी मदद करते। विनोद कांबली कितना सच बोल रहे हैं यह तो वही जानें, लेकिन सचिन पर कीचड़ उछाल कर उन्होंने चंद रुपयों की खातिर बचपन की दोस्ती को दांव पर जरूर लगा दिया है।

प्रेमचंद राजपूत, मोहाली

बच्चों को वाहन न चलाने दें

ट्राई सिटी में स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं। इसके साथ ही सड़कों पर मोटर वाहन चलाते किशोर लड़के-लड़कियां भी बड़ी संख्या में दिखने लगे हैं। बढ़ते सड़क हादसों के मद्देनजर मां-बाप को चाहिए कि वे अपने नाबालिग बच्चों को बाइक, स्कूटर और कार जसे वाहन चलाने से रोकें। यातायात पुलिस को भी अभियान चला कर बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइविंग करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए, खासकर बच्चों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

रोहित सैनी, पंचकूला

शहादत को भूले लोग

कारगिल की जंग को दस साल पूरे हो रहे हैं। काफी दिन तक मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कारगिल के शहीदों और घायलों के नाम काफी गर्व से लिए जते रहे, लेकिन पिछले दिनों से कई खबरें ऐसी पढ़ने को मिलीं कि उस वक्त जो वायदे किए गए थे, सभी पूरे नहीं हुए। और तो और दस साल पूरे होने पर भी किसी ने उनके शहीदी दिवस को याद नहीं रखा। क्या देशभक्ति और देशप्रेम मीडिया की चकाचौंध में दो-चार किताबों से ली गई बातें कहने तक ही सीमित है। यही देशभक्ति का जज्बा है।

 

राकेश शर्मा, चंडीगढ़

दिवस पर कोई योजना नहीं

विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। बढ़ती जनसंख्या पर चिंता प्रकट की गई, लेकिन भविष्य में जनसंख्या पर अंकुश कैसे लगे, ऐसी किसी योजना का खुलासा नहीं किया गया। हां, इतना जरूर कहा गया कि हम चीन की नीति पर नहीं चल सकते हैं। देश को आने वाले वर्षो में बेरोजगारी, आवास तथा अनेक समस्याओं से देश को बचाना है तो बिना वोटों की राजनीति किए बिना राशन कार्ड से लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने वालों के लिए दो बच्चों वाले परिवार की प्राथमिकता को सख्ती से लागू करना होगा, तभी समस्या हल होगी।

 दिनेश गुप्ता, पिलखुवा, उत्तर प्रदेश

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