DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रतिगामी पंचायतें

हरियाणा के रोहतक जिले के एक गांव में तथाकथित सगोत्र विवाह पर हुआ बवाल फिर जति या गोत्रों की पंचायतों पर सवाल खड़ा करता है। शादियों को लेकर ऐसी पंचायतें विवाह रद्द करने से लेकर तो हत्या तक की सजाएं तजबीज करती हैं, जो कि गैरकानूनी है। भारत में विवाह के बारे में संवैधानिक रूप से बने हुए कानून हैं और किसी को यह हक नहीं है कि खुद कानून बना कर सजा भी सुना दे। इस मामले में परंपरा या संस्कृति की दुहाई दी जाती है, लेकिन अक्सर पंचायतें ऐसे फैसले महीनों या कभी-कभी सालों में सुनाती हैं, जिससे यह संदेह होता है कि इन फैसलों के पीछे परंपरा की बजाए कुछ दूसरी ज्यादा ठोस वजहें, जैसे संपत्ति या निजी रंजिश वगैरह होती हैं। अभी जिस शादी को लेकर पंचायत ने बखेड़ा खड़ा किया है, वह शादी भी चार महीने पहले सबकी जनकारी और संभवत: शिरकत के साथ हुई थी। अब चार महीने बाद इस झगड़े की असली वजह और कुछ भी हो सकती है। दूसरे, यह देखा गया है कि पंचायत के फरमानों के शिकार आम तौर पर कमजोर या गरीब लोग होते हैं, जाति के प्रभावशाली और संपन्न लोग अपनी मर्जी से चलने के लिए स्वतंत्र होते हैं। अब भी झगड़ा इसीलिए बढ़ा क्योंकि जिस परिवार को गांव से बाहर करने का फैसला हुआ है, वह भी ताकतवर और प्रभावशाली लगता है तभी उसने पुलिस बुलाने की और पंचायत का फैसला न मानने की हिम्मत की। जो घटनाएं उसके बाद घटीं उनका अर्थ यह है कि यह पारंपरिक पंचायत व्यवस्था बराबरी से न्याय भी नहीं करती और ताकतवर के पक्ष में कमजोर के खिलाफ एक हथियार की तरह काम आती है।

अगर रोहतक के ढराणा गांव का यह परिवार कमजोर होता तो अब तक गांव छोड़कर चला गया होता या इकतरफा हिंसा का शिकार हो गया होता। समाज को रूढ़ियों, पाखंडों और गैरबराबरी से निकालने की बजय ये पंचायतें इन्हीं चीजों को मजबूत बनाने का काम कर रही हैं। समाज सुधार की दृष्टि से ये समांतर पंचायतें गैर जरूरी ही नहीं एक अड़ंगा भी हैं। उनके मुकाबले सरकारी पंचायतें अपेक्षाकृत ज्यादा समावेशी और अग्रगामी हैं। हर दूसरे महीने पंचायतों के फरमान पर तोड़ी जाती शादियों या मारे जाते लड़के-लड़कियों की खबरें एक सभ्य और आधुनिक देश की छवि पर दाग हैं। ऐसी पंचायतों से मुक्ति पाए बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रतिगामी पंचायतें