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बिहार के माथे पर 53 हजार करोड़ का कर्ज

बिहार के माथे पर आज की तारीख में 53 हजार 277 करोड़ रुपये का कर्ज है। वर्ष 2008-09 में बिहार ने 4 हजार 834 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इसके बावजूद कर्ज लेने के मामले में अपना राज्य कई दूसरे राज्यों से काफी पीछे है। उत्तर प्रदेश के माथे पर 1 लाख 88 हजर करोड़, पश्चिम बंगाल के माथे पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश पर 1 लाख 26 हजार करोड़ और गुजरात पर 1 लाख 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। विधानसभा में यह जानकारी उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी। वे भाजपा के विनोद नारायण झ के एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

श्री मोदी ने बताया कि बिहार के माथे पर जो कर्ज है उसमें 32 हजार 106 करोड़ रुपये आंतरिक कर्ज हैं। 7 हजार 432 करोड़ रुपया केन्द्र से लिया गया है जबकि 9760 करोड़ रुपया प्रोविडेंट फंड का है। देश का ऐसा कोई राज्य नहीं है जो कजर्मुक्त हो। राज्य सरकार वेतन और पेंशन के लिए कर्ज नहीं लेती है। विकास के लिए संसाधन जुटाने के लिए ऐसा करना पड़ता है।

भारत सरकार ने नियम बनाया है कि कोई भी राज्य अपने सकल घरेलू उत्पाद का चार प्रतिशत तक कर्ज ले सकता है। इस लिहाज से बिहार सरकार अभी 7062 करोड़ रुपये कर्ज ले सकती है। मुख्यमंत्री ने कर्ज की सीमा को चार से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने की मांग भारत सरकार से की है।

मोदी ने लोजपा के डा. अच्युतानन्द के एक प्रश्न के जवाब में कहा कि कर्मचारियों को दी जा रही एसीपी की सुविधा में हो रही विसंगति को तीन महीने के भीतर दूर कर दिया जाएगा।

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