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गायक बनने का सपना लेकर बालीवुड आए थे गीतकार बख्शी

गायक बनने का सपना लेकर बालीवुड आए थे गीतकार बख्शी

हिंदी फिल्म जगत के जानेमाने गीतकार आनंद बख्शी खुद को गायक के तौर पर पहचान दिलाने के लिए बॉलीवुड आए थे लेकिन वह आवाज का जादू बिखेरने की जगह शब्दों के ताने बाने में उलक्झ गये और गीतकार के रूप में अपनी पहचान बना गये।

21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में जन्मे बख्शी ने पहले सेना में बोर्ड आपरेटर के तौर पर नौकरी की थी लेकिन सपना गायक के तौर पर ख्याति पाने का था, इसलिए कुछ साल की उधेडम्बुन के बाद वह मुंबई चले गये। वहां मौकों की तलाश करत़े-करते खाली समय में वह गीत लिखने लगे।

फिल्म जगत में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का पहला मौका 1956 में मिला, जब भगवान दादा ने फिल्म भला आदमी के चार गीतों के लिए उनसे करार किया। इसके बाद गीतकार के तौर पर उनका फिल्मी करियर शुरू हो गया और उन्होंने अपने जीवनकाल में 300 से अधिक फिल्मों के लिए गीत लिखे।

आनंद बख्शी को सफल गीतकार के तौर पर पहचान 1967 में मिली, जब उन्होंने सुनील दत्त अभिनीत मिलन के लिए गीत लिखे। इसके बाद उन्हें हिंदी फिल्म सिनेमा के जानेमाने संगीतकारों के साथ काम करने का मौका मिलने लगा। आनंद बख्शी के गीतों में खासी विविधता क्षलकती थी। 1972 में फिल्म हरे राम हरे कष्ण का दम मारो दम हो या फिर शोले, बॉबी, अमर प्रेम के गीत हों, उन्होंने हर तरह के गीत लिखे थे। उनके गीतों का सिलसिला 2000 के दशक में भी अनवरत जारी रहा।

हदय और गुर्दे संबंधी बीमारियों से ग्रस्त आनंद बख्शी ने 30 मार्च 2002 को 72 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया था। बख्शी ने कई फिल्मकारों के लिए गीत लिखे थे। उन्होंने शोमैन सुभाषोई की फिल्म गौतम गोविंदा के बाद से उनकी हर फिल्म के लिए गीत लिखे। बख्शी ने 1990 के दशक में यश चोपड़ा की फिल्मों के लिए भी लगातार गीत लिखे।

उन्हें 40 बार फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया और चार बार यह पुरस्कार उनके खाते में आया। अंतिम बार 1999 में सुभाषोई की ताल के गीत इश्क बिना क्या जीना के लिए उन्हें फिल्मफेयर से नवाजा गया था। इसके अलावा भी उन्होंने कई पुरस्कार प्राप्त किये थे। आनंद बख्शी ने सबसे ज्यादा गीत संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत़ प्यारेलाल के लिए लिखे थे। उनके गीतों से सजी कुछ फिल्मों में चांदनी, हम, मोहरा, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, ताल, मोहब्बतें, गदर एक प्रेम कथा, यादें, महबूबा आदि रहीं, जिनके गीत लोगों की जुबान पर आज भी रचे बसे हैं।

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