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कोर्ट में कसाब ने पहली बार कबूला जुर्म

कोर्ट में कसाब ने पहली बार कबूला जुर्म

मुंबई पर बीते साल नवंबर में हुए आतंकवादी हमलों के मामले में जारी सुनवाई में सोमवार को उस वक्त अचानक बड़ा ही नाटकीय मोड़ आया जब हमलों के दौरान जीवित गिरफ्त में आए एकमात्र आतंकवादी मोहम्मद अजमल कसाब ने विशेष अदालत के समक्ष हमलों में अपनी भूमिका स्वीकार की और मामले की सुनवाई जल्द समाप्त करने की मांग की।

पाकिस्तान के 22 वर्षीय नागरिक कसाब ने आर्थर रोड जेल स्थित विशेष अदालत के समक्ष कहा कि मैं अपना जुर्म कुबूल करता हूं। अभियोजन और पुलिस तेजी से हुए इस पूरे घटनाक्रम से सकते में आ गए और विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कसाब के इकबालिया बयान को कम सजा के लिए नई चाल बताया।

निकम ने कहा कि कसाब का अपना जुर्म कुबूल करना अभियोजन के लिए एक बड़ी जीत है। कसाब के जुर्म कुबूलने से विशेष न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी को भी उतनी ही हैरानी हुई। उन्होंने कसाब से पूछा, तुमने तब क्यों जुर्म कुबूल नहीं किया जब आरोप तय किए जा रहे थे।

न्यायाधीश ने कसाब से पूछा कि आज अचानक जुर्म क्यों कुबूल किया। जब पहले आरोप तय हुए, तब क्यों नहीं किया। इस पर कसाब ने कहा कि पहले पाकिस्तान ने यह नहीं माना था कि मैं उनका हूं। आज मान लिया है। इसलिए मैं बयान दे रहा हूं।

जब न्यायाधीश ने पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला कि पाकिस्तान ने ऐसा मान लिया है, इस पर कसाब ने कहा, बस मुझे पता चला। मैंने सुना कि पाकिस्तान ने कहा कि कसाब यहां का है। न्यायाधीश ने जब यह जानना चाहा कि क्या वह किसी तरह के दबाव में आकर ऐसा बयान दे रहा हो, इस पर कसाब ने नहीं में जबाव दिया।

कसाब ने अपना जुर्म कुबूल किया और कराची से मुंबई तक पहुंचने के अपने सफर का ब्यौरा देते हुए बताया कि किस तरह वह अपने नौ अन्य आतंकवादी साथियों के साथ एक नौका के जरिए मुंबई तट पर पहुंचा और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस एवं कॉमा हॉस्पिटल को निशाना बनाया। मुंबई आतंकी हमला मामले में इस वर्ष फरवरी में 11000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

अभियोजन ने सोमवार को विशेष अदालत के समक्ष जब एक गवाह को पेश किया, तब कसाब ने अपने वकील अब्बास काजमी से बात करने की न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी से अनुमति मांगी। कसाब ने काजमी से लगभग आधे मिनट सलाह मश्विरा किया। इसके बाद काजमी ने अदालत को बताया कि कसाब अपना जुर्म कुबूल करना चाहता है।

इस पर विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कहा कि सुनवाई के इस दौर में आरोपी अदालत के समक्ष अपना जुर्म कुबूल नहीं कर सकता। न्यायाधीश ने निकम की इस आपत्ति को खारिज कर दिया और कसाब को अपना जुर्म कुबूल करने की अनुमति दी।

कसाब ने बताया कि किस तरह उसने और उसके मारे गए आतंकवादी साथी अबु इस्माइल ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, कॉमा हॉस्पिटल और अन्य जगहों पर गोलीबारी करके लोगों को मौत के घाट उतारा। कसाब ने अदालत को बताया कि मैं गोलियां चला रहा था और अबु हथगोले फेंक रहा था। मैं अबु के आगे था। अबु ने ऐसी पोजीशन ली थी कि उसे कोई देख नहीं सकता था। मैंने एक पुलिसवाले पर गोलियां चलाईं। उसके बाद पुलिस की ओर से गोलीबारी बंद हो गई।

कसाब ने अदालत को बताया कि वह और अबु किस तरह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से बाहर निकले और कॉमा हॉस्पिटल की ओर बढ़े। कसाब ने कहा कि उसने और अबु ने कॉमा हॉस्पिटल की दीवार लांघी। इसके बाद अबु ने उससे वहीं इंतजार करने के लिएकहा। कसाब ने कहा कि थोड़ी देर बाद अबु वापस आया और मुझे अंदर आने को कहा। अंदर दरवाजे के पास एक लाश पड़ी थी। उसने आगे बताया कि भीतर जाकर अबु ने तीन लोगों से उनके मोबाइल और बैग छीने। कसाब ने कहा कि गवाहों में से एक मंत्रालय का कर्मचारी श्रीवर्धन वहां अचेत अवस्था में पड़ा हुआ था।

कसाब ने अदालत को यह भी बताया कि किस तरह वह और अबु इस्माइल पैदल पुल के जरिए छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर पहुंचे और उसके बाद कॉमा हॉस्पिटल की ओर बढ़े। कसाब को 26 नवंबर की रात दक्षिण मुंबई स्थित गिरगाम चौपाटी से गिरफ्तार किया गया था जबकि उसका साथ अबु पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

लोक अभियोजक निकम ने कसाब के जुर्म कुबूल करने को अभियोजन के लिए एक बड़ी जीत बताया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि सुनवाई तेजी से पूरी की जानी चाहिए और दोषियों को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।

मुंबई हमलों की सुनवाई शुरू होने के बाद पहली बार कसाब को अदालत के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 11000 पन्नों का आरोपपत्र तैयार किया था जिसमें 38 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। आरोपपत्र में इन 38 अभियुक्तों में से 35 को पाकिस्तान के नागरिक और लश्कर ए तैयबा के वांछित सदस्यों के रूप में दिखाया गया था।

इनमें जकी उर रहमान लखवी, यूसिफ मुजम्मई, अबु काफा, अबु रम्जा और जरार शाह के नाम शामिल हैं। इनमें पाकिस्तान के दो बर्खास्त सेनाधिकारियों मेजर जनरल साब और कर्नल आर सादात उल्लाह के नाम भी शामिल हैं।

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