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'अंग्रेजी नहीं आती तो जेएनयू क्यों आए'

'अंग्रेजी नहीं आती तो जेएनयू क्यों आए'

देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एमफिल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए हुई साक्षात्कार परीक्षा के बोर्ड में शामिल सदस्यों पर हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों ने भाषायी आधार पर परेशान करने का आरोप लगाया है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि 13 जुलाई से 15 जुलाई के बीच हुए साक्षात्कार में उनसे अंग्रेजी माध्यम में सिनोप्सिस जमा नहीं करने पर खूब सवाल पूछे गए और मानसिक तौर पर परेशान किया गया। अभ्यर्थियों के आरोप की बाबत जब विश्वविद्यालय के कुलपति बीबी भट्टाचार्य से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं है की दलील देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस) में सोशल सिस्टम विषय में दाखिले के लिए साक्षात्कार में शामिल हुए एक अभ्यर्थी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि मुझसे सदस्यों ने कहा कि जब अंग्रेजी नहीं आती तो जेएनयू क्यों चले आते हो, बिना अंग्रेजी के जेएनयू का सपना भूल जाओ।

इसी तरह, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में दक्षिण एशिया मामलों में अध्ययन के लिए जेएनयू से एमफिल करने का सपना लिए एक अभ्यर्थी ने बताया कि साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों ने मुझसे कहा कि हिंदी में यह पढ़ाई नहीं कर पाओगे। ऐसी ही शिकायत हिन्दी माध्यम के कई अन्य अभ्यर्थियों ने भी की ।

बहरहाल, जब इस बाबत विश्वविद्यालय के कुलपति बीबी भट्टाचार्य से संपर्क किया गया तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया और कहा मैं इन मामलों को नहीं देखता। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। आप संबंधित विभाग से इस बारे में बात करें।

हालांकि, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर आनंद कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों से यह कहा गया था कि आप लोगों ने लिखित परीक्षा तो हिन्दी में पास कर ली अब अपनी सिनोप्सिस तो अंगेजी में जमा करना चाहिए था।

अभ्यर्थियों की ओर से मानसिक तौर पर परेशान करने के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार बोर्ड में शामिल ज्यादातर सदस्यों में हिंदी भाषी सदस्य थे। इस वजह से अभ्यर्थियों का आरोप सही नहीं है ।

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