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मेट्रो को जनता का भरोसा जीतने का भरोसा

दक्षिण दिल्ली के जमरूदपुर में हाल में हुई दुर्घटना से राजधानी की लाइफलाइन मेट्रो की बेदाग छवि पर कुछ असर जरूर पड़ा है, लेकिन उसे जनता का विश्वास फिर से हासिल कर लेने का पूरा भरोसा है। मेट्रो के प्रवक्ता अनुज दयाल ने कहा।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर चुके दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की छवि पर अपने ग्यारह वर्ष के इतिहास के इस सबसे बडे¸ हादसे से निर्माण सामग्री में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ खडे¸ हुए हैं, लेकिन ‘मेट्रोमैन’ के रूप में दिल्लीवासियों के दिल में अपनी जगह बनाने वाले मेट्रो के प्रबंध निदेशक ई श्रीधरन की नेकनीयती और बुलंद हौसलों पर पूरा भरोसा है।

श्रीधरन ने इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया क्योंकि सरकार को उन पर पूरा विश्वास है। डीएमआरसी के प्रवक्ता अनुज दयाल ने विशेष बातचीत में स्वीकार किया कि निर्माण कार्य के दौरान होने वाले हादसों से लोगों में गलत संदेश गया है, लेकिन उनका विश्वास फिर से हासिल कर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस तरह के हादसों से दिल्ली मेट्रो के कर्मचारियों और अधिकारियों के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा है। उनका कहना था कि जब तक मेट्रो के पास श्रीधरन हैं तब तक मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ सकता है। दयाल ने कहा कि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मेट्रो के दूसरे चरण के हर ढांचे की जांच होगी। जांच की जिम्मेदारी स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को सौंप दी गई है।

उन्होंने कहा कि मेट्रो में काम कर रहे कर्मचारियों और मजदूरों में वेतनमान को लेकर कोई असंतोष नहीं है। सभी कर्मचारी पूरे मनोबल के साथ अपने काम में लगे हुए हैं। दयाल ने निर्माण कार्य के दौरान होने वाले हादसों के बारे में कहा कि इस तरह की दुर्घटनाएं परियोजनाओं के दौरान कभी-कभी हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएं भारत में ही हुई हैं, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।

मेट्रो ने जमरूदपुर हादसे में पुल गिरने की वजह पिलर की कैप टूटना बताया है। लेकिन अभी यह पता नहीं लग पाया है कि कैप गलत डिजाइन की वजह से टूटी या इसकी निर्माण सामग्री में कुछ गड़बड़ थी। हालांकि निगम की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हाल की रिपोर्ट में परियोजना स्थलों पर गुणवत्ता नियंत्रण में ढिलाई का खुलासा किया गया है। इससे इतना तो तय है कि किसी न किसी स्तर पर धांधली जरूर हुई है। दिल्ली मेट्रो का कहना है कि जमरूदपुर हादसे की असली वजह का पता जांच के बाद ही चलेगा। जांच रिपोर्ट 22 जुलाई तक आने की उम्मीद है।

दयाल ने उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि राष्ट्रमंडल खेलों के कारण मेट्रो रेल परियोजनाओं को पूरा करने में जल्दबाजी की जा रही है। उन्होंने सवाल के रूप में इन खबरों पर जवाबी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मेट्रो परियोजनाओं का काम समय से पहले पूरा हो रहा है तो उन्हें पूरा करने में जल्दबाजी क्यों की जाएगी।

दिल्ली मेट्रो के इतिहास में दो काले रविवारों को लोग हमेशा के लिए भूलना चाहेंगे। मेट्रो परियोजनाओं के निर्माण के दौरान पिछले साल 19 अक्टूबर और इस साल बारह जुलाई को हुए हादसों का दिन रविवार ही था। ताजा हादसे में राजधानी के ईस्ट आफ कैलाश इलाके के जमरूदपुर में दिल्ली मेट्रो के निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर ढक गया, जिसमें छह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

पिछले साल 19 अक्टूबर का दिन लक्ष्मी नगर विकास मार्ग हादसे का गवाह बना। उस हादसे में मेट्रो का लांचिंग गार्डर और निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा एक बस पर गिर गया, जिससे दो व्यक्तियों की मौत हो गई थी और 12 घायल हो गए थे।

हालांकि मेट्रो परियोजनाओं के निर्माण के दौरान इन कुछ इक्का-दुक्का दुर्घटनाओं से लोगों का विश्वास कुछ डगमगाया जरूर है, लेकिन उन्होंने इन हादसों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया है। मेट्रो से प्रतिदिन कश्मीरी गेट स्थित अपने कार्यालय जाने वाले बैंक प्रबंधक पंकज गुप्ता ने कहा कि इस तरह के हादसों से हालांकि नकारात्मक असर पड़ता है, लेकिन उनका मानना है कि इस तरह के हादसे कहीं भी हो सकते हैं। रेलवे और सड़क मार्ग पर भी इस तरह के हादसे हुए हैं।

अशोक विहार में एक निजी स्कूल की शिक्षिका उषा शर्मा ने कहा कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि दुनिया में मेट्रो का रुतबा है। देश-विदेश के कई लोग तो केवल मेट्रो में घूमने के लिए राजधानी आते हैं।  मेट्रो से हर रोज अपनी दुकान जाने वाले मोहम्मद इमामुद्दीन सलमानी ने कहा कि हम चाहते हैं कि हादसे नहीं हो लेकिन कभी-कभार ऐसा हो जाता है। इन हादसों के बावजूद मेरा मेट्रो पर विश्वास कायम है। दिल्ली की सड़कों पर कार या मोटर साइकिल से जाने की तुलना में मेट्रो रेल से जाना कहीं ज्यादा सुरक्षित है।

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