अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

62 के हुए चेतन, कहा पटौदी हैं सर्वश्रेष्ठ कप्तान

62 के हुए चेतन, कहा पटौदी हैं सर्वश्रेष्ठ कप्तान

21 जुलाई 1947 को बरेली में जन्मे चौहान ने अपने 62वें जन्मदिन के अवसर पर गावस्कर से अपनी बेमिसाल जोड़ी के राज से लेकर राजनीतिज्ञ बनने तक के सफर पर बात की।

अपनी दृढ़ता, जज्बे और साहस के कारण दुनिया के खतरनाक गेंदबाजों के सामने सुनील गावस्कर के साथ मिलकर भारत को कई बार शानदार शुरुआत दिलवाने वाले चेतन चौहान अब शॉर्ट पिच गेंदों को भारतीय बल्लेबाजों की कमी नहीं मानते लेकिन उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी की टीम को आगे के व्यस्त कार्यक्रम से पहले अपनी छोटी से छोटी कमजोरी को दूर करने की सलाह दी।

चौहान ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि शॉर्ट पिच गेंद भारतीयों की बहुत बड़ी कमजोरी है, लेकिन बल्लेबाज को इसके लिये हमेशा मेहनत की जरूरत पड़ती है। भारतीय इसे कमजोरी मानकर नहीं चलें तो बेहतर होगा क्योंकि विपक्षी टीम कमजोरी का पता चलने पर उसी के हिसाब से रणनीति बनाती है और ऐसे में तेज गेंदबाज भारतीयों पर हावी हो सकते हैं।

एक जमाने में तेज गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाती थी लेकिन गावस्कर और चौहान की सलामी जोड़ी ने कई बेहतरीन साझेदारियां निभाकर विश्व क्रिकेट का नजरिया बदल दिया था। चौहान ने कहा कि पहले यही माना जाता था कि हमारे बल्लेबाज तेज गेंदबाजी नहीं खेल पाते लेकिन हम दोनों इसमें बदलाव लेकर आए। हमने न सिर्फ उन्हें बखूबी खेला बल्कि खूब रन भी बटोरे जिससे दुनिया का नजरिया बदला।

गावस्कर और चौहान ने मिलकर 60 पारियों में 54.85 की औसत से 3127 रन जोड़े जिसमें 11 शतकीय और दस अर्धशतकीय पारियां शामिल हैं। भारत की यह अब भी सबसे सफल सलामी जोड़ी है और चौहान के अनुसार इसका राज एक दूसरे से बेहतर तालमेल, पारी के बीच लगातार चर्चा करना और देश के करोड़ों लोगों की अपेक्षाओं को समझना था।

उन्होंने कहा कि हम दोनों शुरू से बहुत अच्छे दोस्त थे तथा पश्चिम क्षेत्र की तरफ से साथ में पारी का आगाज करते थे। पारी के दौरान लगातार एक दूसरे से संपर्क बनाये रखते थे और मराठी में बात करने के कारण कोई हमारी बात भी नहीं समझ पाता था। वह (गावस्कर) बहुत बड़े खिलाड़ी थे लेकिन हम दोनों एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते थे और समझते थे कि हमसे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं।

चौहान ने अपने कैरियर में 40 टेस्ट मैच की 68 पारियों में 2084 रन बनाए लेकिन इसमें एक भी शतक शामिल नहीं है जबकि उनके नाम पर 93 और 97 रन की दो पारियां दर्ज हैं तथा कुल छह बार उन्होंने 80 या इससे अधिक रन बनाये। वह बिना शतक लगाये दो हजार से अधिक टेस्ट रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं।

इस बारे में चौहान ने कहा कि ऐसा दबाव में नहीं हुआ। इसे आप संयोग मान सकते हैं। मैं रिकॉर्ड के लिए नहीं खेलता था और मेरा एकमात्र उद्देश्य क्रीज पर अधिक से अधिक समय तक टिके रहना होता था।

चौहान ने धोनी को भारत का सर्वश्रेष्ठ कप्तान मानने से इन्कार किया और यह दर्जा मंसूर अली खां पटौदी को दिया जिन्होंने टीम को जीतना सिखाया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि उनके (पटौदी) जमाने में हमारे पास स्पिन चौकड़ी थी और टर्निंग विकेट बनाए जाते थे लेकिन पटौदी ने ही सबसे पहले हमें सिखाया था कि मैच कैसे जीते जाते हैं। वह बहुत अच्छे रणनीतिज्ञ थे और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे।

चौहान ने इसके साथ ही 1981 की उस घटना पर भी खुलकर बात की जब डेनिस लिली की गेंद पर गलत आउट दिये जाने से गुस्साये गावस्कर ने चौहान को अपने साथ चलने के लिये कहा था, जिससे यह मामला काफी गरमा गया। उन्होंने कहा कि वास्तव में तब गावस्कर आउट नहीं थे और गेंद बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी। मैं अब भी मानता हूं कि वॉकआउट करना सही नहीं था और यही वजह थी कि मैं वापस जाते समय हिचकिचा रहा था लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गावस्कर का गुस्सा जल्द खत्म हो गया था और उन्हें बाउंड्री लाइन पर पता चला कि वास्तव में मैं भी उनके साथ चल रहा हूं।

क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने चौहान अपनी दूसरी पारी को काफी मुश्किल मानते हैं लेकिन उनकी नजर में क्रिकेटर के पास अधिक जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि एक सांसद पर अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी होती है लेकिन क्रिकेटर पर पूरे देश की आशाएं टिकी होती हैं।

 

 

 

 

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:62 के हुए चेतन, कहा पटौदी हैं सर्वश्रेष्ठ कप्तान