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बीपीओ का मोह

मोटी तनख्वाह, आने-जाने के लिए गाड़ी, मुफ्त में खाना और फटाफट प्रमोशन के मौके- अगर नौकरी में ये सब मिले, तो कोई बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग) सेक्टर यानी कॉल सेंटर क्यों न जॉइन करे? भारत में करीब पांच साल पहले आम ग्रेजुएट्स को आसानी से सलेक्ट करने वाले ऐसे सेंटर गुड़गांव में खुलने शुरू हुए थे, जिनकी लोकप्रियता युवा पीढ़ी में दिन-ब-दिन बढ़ती ही चली गई। और आजकल मंदी के दौर के बावजूद कॉल सेंटर जॉब का चस्का कम नहीं हुआ है। इस वक्त देश में करीब 11 लाख लोग बीपीओ सेक्टर में काम कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर की उम्र 30 साल से कम है। अगले साल तक ये संख्या बढ़कर 30 लाख हो जाने की उम्मीद है।

कैसे जाएं इस सेक्टर में?
कॉल सेंटर में तैनात कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव या एजेंट अमेरिका, इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की क्लायंट कंपनियों के ग्राहकों के फोन अटैंड करके उन कंपनियों की तरफ से जवाब देते हैं। इसके लिए उसे पहले से ट्रेंड किया जाता है। ये जॉब पाने के लिए 10वीं क्लास के स्तर का रिटन टेस्ट (इंग्लिश, रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड) और इंटरव्यू पास करना होता है। इग्नू, एनआईआईटी या हीरो माइंडमाइन से इसकी तैयारी की जा सकती है। बस, आपको बोलचाल की अच्छी अंग्रेजी, कंप्यूटर का ज्ञान, सब्र और रीजनिंग की पावर होनी चाहिए। इसके अलावा टैक्नीकल सपोर्ट के पद भी होते हैं।

अच्छा पैकेज
एक बार सलेक्ट हो जाने के बाद आपको 12 से 15 हजार मासिक वेतन, गाड़ी से आने-जने की सुविधा, ड्यूटी के दौरान खाना, ओवरटाइम एलाउंस जैसे इंसेंटिव (2 से 12 हजार तक) भी मिलते हैं। मैनेजर बनने पर आपका वेतन 50 से 70 हजार, और असिस्टेंट वीपी के पद पर एक से डेढ़ लाख रुपए तक हो जाता है

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