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भत्तों पर टैक्स चुकाएंगे कर्मचारी

भत्तों पर टैक्स चुकाएंगे कर्मचारी

जब बजट में एफबीटी को हटाने की घोषणा वित्त मंत्री ने की तो हर कोई इस बात से खुश हो गया। पर यह खुशी सिर्फ कंपनियों के लिए थी यह बात समझने में लोगों ने देर लगा दी। फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) कर्मचारियों को चुकाना ही पड़ेगा, क्योंकि इससे सिर्फ कंपनियों को राहत दी गई है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने छह जुलाई को संसद में पेश आम बजट में एफबीटी समाप्त करने की घोषणा की थी। एफबीटी वर्ष 2005 के वित्त विधेयक में लागू किया गया था। यह कर कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन के अलावा दिए जाने वाले भत्तों और सुविधाओं पर लगाया गया था।

इस बजट में उसे समाप्त कर दिया गया है। लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अब कर्मचारियों को उन्हें मिलने वाले भत्तों और सुविधाओं पर कर देना होगा। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जल्दी ही उन सुविधाओं की सूची जारी कर दी जाएगीजिन्हें कर्मचारियों की आय में शामिल कर उनसे कर वसूला जाएगा। कंपनी की तरफ से दी गई कार अथवा अपनी कार पर आने वाले खर्च का क्षतिपूर्ति भत्ता, घरेलू नौकर (जिसका वेतन कंपनी चुकाती है), निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा, उपहार-खाने के कूपन, क्लब की सदस्यता (जिसका भुगतान नियोक्ता द्वारा किया गया है) तथा यात्रा अथवा छुट्टियों के लिए दिया जाना वाला भत्ता। इन सभी को कर्मचारी की आय में शामिल कर उसपर आयकर लग सकता है।

सरकार को एफबीटी से पिछले वर्ष करीब 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। कंपनियों पर एफबीटी 30 प्रतिशत की दर से लगता रहा है जबकि कर्मचारियों में आयकर स्लैब के अनुरूप इसकी भरपाई करनी होगी। मंत्रालय सूत्रों का कहना है किकर्मचारियों के भत्तों की सूची करीब-करीब वही हो सकती है जो कि एफबीटी से पहले हुआ करती थी। उन्हें ही उनकी आय काहिस्सा मानकर उस पर कर लगाया जा सकता है। भत्तों का कुल मूल्य उनकी वार्षिक आय में जोड़कर आयकर स्लैब के मुताबिक आयकर वसूला जाएगा। बजट दस्तावेजों में एफबीटी का  जिक्र करते हुए कहा गया है कि सरकार आयकर की धारा 17 के अनुच्छेद दो को संशोधित कर सूची जारी करेगी जो कि एक अप्रैल 2010 से लागू होगी।  

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