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मानसून के मिजाज से हैरत में हैं वैज्ञानिक-किसान

झारखंड में बीते पांच दशक में पहली बार मानसून का यह रंग दिख रहा है। एक तो समय से काफी लेट। आया भी तो धीमा। यह देख किसान और वैज्ञानिक दोनों हैरत में हैं। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान की बारिश सीधी बुआई के लिए ठीक है। इससे रोपा धान की बुआई में मुश्किल होगी।

सर्वाधिक देर होने पर भी मानसून 20 से 27 जून तक दस्तक दे देता था। बीते 53 साल में तीन से चार बार ही इसके बीच आया। करीब 41 दफा यह 15 जून से पहले आया है। वर्ष 2009 में यह 28 जून को आया। बिरसा कृषि विवि के वज्ञानिक डॉ ए वदूद के अनुसार आने के बाद भी इसके हाव-भाव असामान्य हैं।

मानसून सामान्य पथ को फॉलो नहीं कर रहा है। आम तौर पर यह अरब सागर, केरल, कर्नाटक, बंगाल की खाड़ी होते हुए उत्तर पश्चिम तक जाता है। इस बार रास्ते से भटका और झूलता हुआ लग रहा है। यही नहीं, दस्तक देकर भी यह पूरी तरह से प्रभावकारी नहीं है।

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