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विस चुनाव की तैयारी में जुटीं राजनीतिक पार्टियां

केंद्र ने झारखंड में राजनीतिक दलों को बड़ा टास्क दे दिया है। मानसून के बाद चुनाव होंगे। मानसून खत्म होते-होते सितंबर बीत जाएगा। उसके बाद पर्व-त्योहारों की  धूम रहेगी। इससे निपटने के बाद फसल कटने के दिन आ जाएंगे। तब तक नवंबर-दिसंबर पहुंच जाएगा।

महीने के हिसाब से जोड़ कर देखें तो दलों को तैयारी के लिए तीन-चार महीने का ही समय रह गया है। काम ज्यादा है और अब समय कहां है? टिकट बांटने, काटने और मैदान में उतरने के पहले दलों को कई काम करने होते हैं।  सबसे पहले जनजागरण का काम करना होगा। कांग्रेस, भाजपा, झामुमो, जदयू ने तो बाकायदा जनता के पास जाने के लिए कार्यक्रम घोषित कर दिए हैं।

कांग्रेस ने जुलाई के बीते सप्ताह में प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया। सोमवार को शुरू हो रहे सप्ताह में जिलावार आंदोलनात्मक कार्यक्रम  होंगे। झमुमो ने भी पिछले सप्ताह प्रखंड स्तर का आंदोलनात्मक कार्यक्रम पूरा कर लिया है। 21 जुलाई को जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन होगा। झमुमो  के केंद्रीय संगठन सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक आंदोलनात्मक कार्यक्रम पूरा होने के बाद बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण शुरू होगा।

भाजपा भी जनजागरण और आंदोलनात्मक कार्यक्रम तैयार कर चुकी है। अगस्त महीने में महंगाई के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन होंगे। प्रदेश प्रवक्ता संजय सेठ के अनुसार महिला मोर्चा, युवा मोर्चा पंचायत स्तर तक आंदोलन करेंगे। युवा मोर्चा साइकिल यात्रा निकालेगा। हर पंचायत तक पहुंचने की योजना है। फिर प्रदेश स्तरीय नेताओं का दौरा शुरू होगा।

राजग में भाजपा की सहयोगी पार्टी जदयू ने अपना अलग  से आंदोलनात्मक कार्यक्रम घोषित कर दिया है। चुनाव की तैयारी के लिए पार्टी पदाधिकारियों की बैठक और 21 से आंदोलन शुरू होंगे। सुखाड़, महंगाई और बढ़ते अपराध के खिलाफ 25 को राजभवन के सामने पार्टी धरना देगी।

अन्य दलों मसलन झविमो, आजसू और वामदल भी तैयारियों में जुट गई हैं। फिर शुरू होगा नेताओं का पाला बदल और दल बदल। इसी बीच टिकट बांटने, काटने और दलों से आगमन, निष्कासन का काम चुनाव घोषणा के बाद तक चलता रहेगा।

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