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लंगर में दिख रही है सामाजिक समरसता की झलक

नहीं जात पात का बंधन और न ओहदे का गरूर। मानों ऐसे की राज रंक की दूरी समाप्त हो गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे बीस से अधिक लंगरों में इन दिनों यह दृश्य आम है। इसमें खास से लेकर आम तक शामिल है।

कोई मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम करने वाला है तो कोई रिक्शा चलाता है। साथ बैठ भोजन करने में इन्हें कोई एतराज नहीं होती है। लंगर में इनके बीच का फर्क मिट गया है। लंगर में दोनों साथ मिलकर जमीन पर बिछाए कालीन पर बैठ भोजन का आनंद लेते देख सकते हैं।

शायद अन्य दिनों में यह दुर्लभ हो। लेकिन सावन ने इसे सुलभ बना दिया है। दिल्ली-मथुरा रोड और शहर के महत्वपूर्ण चौक चौराहों पर शिवभक्तों के लिए समाजसेवियों ने बड़ी संख्या में लंगर लगाए गए हैं। इसमें लंच के समय यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कांवरियों के साथ अन्य भी प्रसाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं।

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