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पशुओं का प्रहार

बेचारे सारे के सारे बेजुबान हैं। बंदूक-राइफल से लैस आदमी के सामने लाचार। कोई उनकी खाल का ग्राहक है, कोई गोश्त का, कोई दांत या सींग का। लोग उनके शरण्य-स्थल में भी उनको नहीं बख्शते हैं। जो एक दूसरे के खून का प्यासे हैं वे भला जानवरों को कैसे और क्यों बख्शेंगे? जानवर भले एक दूसरे को माफ कर दें, इंसान चारित्रिक-दान खुशी खुशी करने को प्रस्तुत है, क्षमा-दान नहीं। हमारे मित्र पशुओं के डॉक्टर हैं। वह आगे बताते हैं कि इधर पक्षी-पशु भी इंसान जैसी तरक्की कर रहे हैं। पहले मुर्गे-मुर्गियों ने विद्रोह किया, फिर सुअरों ने। उनके अंदर भी बदले की भावना घर कर रही है।

साथ ही उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि हिन्दुस्तान को ‘स्वाइन फ्लू’ जैसे मर्ज से खास खतरा नहीं है। हमने सोचा कि डॉक्टर साहब मजाक कर रहे हैं। हालात इतने गए-गुजरे हैं कि दिल-मधुमेह तक के हजारों शिकार मुल्क में मौजूद हैं। कुछ को तो पता है, कुछ को खबर तक नहीं है। अगर जान भी गए तो मजबूर हैं। निजी डॉक्टर के पास जाने का उनका बूता नहीं। सरकारी डॉक्टर, बिना कुछ लिए, सिर्फ जान लेने पर उतारू हैं। अब परिवार का पेट भरें कि डॉक्टर की जेब। उन्होंने हमें समझया कि वह गंभीर हैं। स्वाइन फ्लू मैक्सिको-अमेरिका की देन है। फिलहाल, सात समुन्दर पार रेल से यात्रा नामुमकिन है। हवाई सफर पर इन देशों में रईसों यारईसजदों का एकाधिकार है। वही, शिकार हैं स्वाइन फ्लू के। आंकड़ों के अनुसार इस मुल्क के पचास प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे रह गुजरा कर रहे हैं। उनकी जिन्दगी कौन सुअरों से बेहतर है? कभी एक ने दूसरे सुअर को मारा है, जो यह अनहोनी करेगा वह। ऐसे इंसानों की दुश्वारियां देख कर, क्या पता सुअर का दिल भी भर आए। वह कोई आदमी तो है नहीं। उसके सुअर-अंतर में थोड़ा बहुत रहम शेष है अभी। अपने से बदतर पर कैसे दांत गड़ाए?
 
आतताई को इंसानों के बारे में इतना जहर उगलते हमने कम सुना था। हम उनसे नाराजी का कारण पूछ पाते कि वह सरकार पर बरस पड़े। आम आदमी के हिमायती आज क्या कर रहे हैं? हमें तो लगता है वह इरादतन पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ाकर ‘स्वाइन फ्लू’ से निर्धनों की सुरक्षा में जुटे हैं, उन्हें और गरीब बनाकर। उन्हें यकीन है। इस देश में अभाव से लोग भले चल बसें, ‘स्वाइन फ्लू’ से कोई नहीं मरेगा। चलते-चलते उन्होंने बताया कि दुनिया का सबसे सीधा चौपाया गाय है। उनकी जरसी गाय को विगत रात कोई खोल ले गया। अभी सिर्फ सुअरों ने किया है, गाय ने भी विद्रोह कर दिया तो अंजाम क्या होगा।

 

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